भारत–कनाडा रीसेट 2026: $50B व्यापार, CEPA और यूरेनियम डील

भारत–कनाडा रिश्तों में बड़ा ‘रीसेट’: 2030 तक $50 बिलियन व्यापार लक्ष्य, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई अहम द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी। 2023 के राजनयिक तनावों के बाद यह मुलाकात रिश्तों के बड़े “रीसेट” के रूप में देखी जा रही है।

बैठक में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया, 2026 के अंत तक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई, और ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा तथा महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की घोषणा की गई।

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नई दिल्ली में पीएम मोदी और पीएम कार्नी की मुलाकात — रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय

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मुख्य घटना: नई दिल्ली में रणनीतिक वार्ता और संबंधों का पुनर्गठन

2 मार्च 2026 को हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत और कनाडा अब अपने संबंधों को आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ाएंगे। 2023 के राजनयिक तनावों के बाद यह यात्रा संबंधों में स्थिरता और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक का केंद्र व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग रहा। दोनों देशों ने वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक-दूसरे को विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखा।

$50 बिलियन व्यापार लक्ष्य और CEPA पर सहमति

दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को $50 बिलियन तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। इसके लिए Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) की वार्ता को तेज करने और 2026 के अंत तक इसे अंतिम रूप देने पर सहमति बनी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कनाडा के पेंशन फंडों ने भारत में लगभग $100 बिलियन का निवेश किया है, जो भारत की विकास क्षमता में उनके विश्वास को दर्शाता है।

ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर ऐतिहासिक सहयोग

ऊर्जा क्षेत्र को इस नई साझेदारी की आधारशिला माना जा रहा है। कनाडा की कंपनी Cameco के साथ 10-वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।

इसके अलावा, दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन साझा किए। ये खनिज सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित ऊर्जा तकनीकों के लिए आवश्यक हैं।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत परमाणु तकनीकों पर संयुक्त कार्य तथा एक नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग की बहाली

दोनों देशों ने रक्षा संवाद को फिर से शुरू करने और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

आतंकवाद, कट्टरवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग आवश्यक है।

प्रमुख समझौते और पहल

क्षेत्र समझौते का विवरण
आर्थिक CEPA के संदर्भ की शर्तें और विनिमय दस्तावेज
ऊर्जा 10-वर्षीय यूरेनियम आपूर्ति समझौता
खनिज Critical Minerals पर सहयोग
शिक्षा कनाडा-भारत टैलेंट और इनोवेशन स्ट्रेटजी के तहत 13 नई साझेदारियां
खाद्य सुरक्षा ज्वाइंट पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
प्रौद्योगिकी भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय नवाचार समझौता

पृष्ठभूमि: 2023 के तनाव के बाद नया अध्याय

पिछले तीन वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव रहा था, विशेषकर सिख अलगाववादी नेता की हत्या के आरोपों को लेकर। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान विवाद बढ़ा, जिससे राजनयिक संबंध प्रभावित हुए।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए संबंधों को पुनर्संतुलित करने की पहल की है। वैश्विक व्यापारिक दबाव, चीन का बढ़ता प्रभाव और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की आवश्यकता ने इस बदलाव को गति दी।

वैश्विक संदर्भ और रणनीतिक महत्व

अमेरिका द्वारा संभावित व्यापार शुल्क और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच कनाडा भारत को एक स्थिर और उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहा है। वहीं भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और परमाणु ईंधन आपूर्ति के लिए कनाडा को विश्वसनीय स्रोत मानता है।

प्रधानमंत्री कार्नी की यह यात्रा, जिसमें भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया और जापान का दौरा भी शामिल है, कनाडा की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

निष्कर्ष: रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा

भारत और कनाडा के बीच यह “रीसेट” केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत है। ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत बना सकते हैं।

आने वाले महीनों में CEPA वार्ता की प्रगति और यूरेनियम आपूर्ति समझौते का क्रियान्वयन इस नई साझेदारी की सफलता का प्रमुख संकेतक होगा।

यह पहल वैश्विक अनिश्चितता के दौर में दो लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास, सहयोग और रणनीतिक संतुलन का मजबूत संदेश देती है।

FAQs: भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी 2026
भारत और कनाडा ने व्यापार का क्या लक्ष्य तय किया है?

दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को $50 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

CEPA क्या है और कब तक पूरा होगा?

CEPA एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता है, जिसे 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने की योजना है।

यूरेनियम समझौते का क्या महत्व है?

यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।

रक्षा सहयोग में क्या निर्णय हुआ?

दोनों देशों ने संरचित रक्षा संवाद बहाल करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

इस साझेदारी का वैश्विक महत्व क्या है?

यह साझेदारी वैश्विक अस्थिरता के दौर में आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करेगी।

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