मिडिल ईस्ट संकट: 'भारत दलाल नहीं', एस. जयशंकर का पाकिस्तान पर करारा तंज

मिडिल ईस्ट संकट पर भारत का साफ संदेश: 'हम दलाल नहीं', जयशंकर ने पाकिस्तान पर कसा तंज

सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री ने साफ किया कि भारत किसी का 'बिचौलिया' नहीं है। हमारी विदेश नीति किसी के दबाव में नहीं, बल्कि देशहित में चलती है।

पीएम मोदी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति से बात कर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि युद्ध से दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट पर सर्वदलीय बैठक
मिडिल ईस्ट संकट पर भारत सरकार की सर्वदलीय बैठक (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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'भारत दलाल नहीं, अपने फैसले खुद लेता है'

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालात के बीच, केंद्र सरकार ने बुधवार को सभी पार्टियों की एक अहम बैठक बुलाई। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बात बिल्कुल साफ कर दी। उन्होंने उन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि भारत, अमेरिका और ईरान के बीच बीच-बचाव करेगा या मध्यस्थता करेगा।

जयशंकर ने सीधे शब्दों में कहा कि "भारत कोई दलाल या ब्रोकर देश नहीं है।" उन्होंने इशारों-इशारों में पाकिस्तान पर भी तंज कसा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान अक्सर ऐसे मौकों पर वाशिंगटन से फायदे लेने के लिए खुद को एक बिचौलिये के रूप में पेश करता रहा है। पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालें तो:

  • 1971 में उसने अमेरिका और चीन के बीच बिचौलिया बनने की कोशिश की।
  • 1981 में अमेरिका और ईरान के मामले में भी वह बीच में कूदा।
  • 2019 में सऊदी अरब और ईरान के बीच मध्यस्थता की।
  • 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच डील करवाने का काम किया।

भारत और पाकिस्तान की सोच में बड़ा फर्क

भारत हमेशा से सबके साथ मिलकर चलने की स्वतंत्र नीति पर काम करता है। हमारे ईरान के साथ पुराने और अच्छे रिश्ते हैं, इसलिए हमें किसी तीसरे देश या पिछले दरवाजे से बात करने की जरूरत नहीं है। आइए देखते हैं दोनों देशों के तरीके में क्या बड़ा अंतर है:

भारत (India) का रुख पाकिस्तान (Pakistan) का तरीका
देश का हित और अपने फैसले खुद लेने की आजादी अमेरिका से फायदे लेने की कोशिश
ईरान के साथ पुराने और मजबूत व्यापारिक संबंध हमेशा बिचौलिये या 'दलाल' की भूमिका निभाना

पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर भारत की चिंताएं सामने रखी हैं। पीएम ने साफ किया कि इस युद्ध से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंच रही है। भारत के व्यापार के लिए 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का खुला और सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है, और यह भारत के लिए एक तरह की 'रेड लाइन' है।

अहम मुद्दे भारत की स्पष्ट मांग
वैश्विक अर्थव्यवस्था युद्ध से सबको नुकसान है, इसे जल्द रोका जाए।
व्यापारिक रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।

"भारत कोई 'ब्रोकर' (दलाल) राष्ट्र नहीं है। हमारी विदेश नीति किसी के दबाव में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के आधार पर संचालित होती है।"

— एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

विपक्ष के तीखे सवाल और सरकार के जवाब

बैठक में विपक्ष ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे। असदुद्दीन ओवैसी ने रूसी तेल की खरीद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि भारत की नीति बार-बार क्यों बदल रही है। इसके अलावा, विपक्षी नेताओं ने ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर शोक जताने में हुई देरी पर भी सवाल किए। विदेश मंत्री ने साफ किया कि ईरानी दूतावास 5 दिनों तक बंद था, इसलिए शोक संदेश भेजने में वक्त लगा।

विपक्ष के सवाल सरकार का स्पष्टीकरण
रूसी तेल की नीति में बदलाव क्यों? देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है, 60 मिलियन बैरल तेल सुरक्षित किया गया है।
ईरानी नेता के निधन पर चुप्पी क्यों? ईरानी दूतावास पांच दिनों तक बंद था, इसलिए देरी हुई।

संकट से निपटने के लिए भारत की पुख्ता तैयारियां

  • पर्याप्त ईंधन: पेट्रोलियम मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पूरा स्टॉक मौजूद है।
  • रूसी तेल का बैकअप: भविष्य की जरूरत के लिए भारत ने 60 मिलियन बैरल रूसी तेल पहले ही बुक कर लिया है।
  • समुद्री सुरक्षा: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के 5 युद्धपोत तैनात कर दिए गए हैं।
  • नागरिकों की वापसी: अब तक ईरान से 4.25 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। फंसे हुए 18 जहाजों की कड़ी सुरक्षा की जा रही है।

निष्कर्ष: भारत की दमदार और संतुलित कूटनीति

इस सर्वदलीय बैठक से पूरी दुनिया को यह साफ संदेश गया है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा है। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह दुनिया में खुद एक बड़ी ताकत है और उसे किसी के लिए 'ब्रोकर' बनने की कोई जरूरत नहीं है।

आने वाले समय में भारत अपनी इसी स्वतंत्र नीति पर चलेगा। एक तरफ वह अमेरिका जैसे बड़े कारोबारी साथी के साथ रिश्ते निभाएगा, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती भी कायम रखेगा। भारत की यह नीति शांति और संतुलन की है, जो दुनिया की भलाई के लिए है।

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मिडिल ईस्ट संकट और भारत - आम सवाल (FAQs)
सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री ने मुख्य रूप से क्या कहा?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच कोई 'बिचौलिया' या दलाल नहीं बनेगा। भारत अपने फैसले खुद लेता है।

पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से क्या बात की?

पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध से दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने व्यापारिक रास्तों (खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) को सुरक्षित रखने की अपील की।

क्या युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी होगी?

बिल्कुल नहीं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही 60 मिलियन बैरल रूसी तेल भी सुरक्षित कर लिया गया है.

विपक्ष ने सरकार से क्या मुख्य सवाल पूछे?

विपक्ष ने मुख्य रूप से रूसी तेल की खरीद में आ रहे बदलावों और ईरानी नेता के निधन पर शोक संदेश में हुई देरी को लेकर सवाल किए, जिनका सरकार ने संतोषजनक जवाब दिया।

संकट वाले इलाके में फंसे भारतीयों के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

अब तक 4.25 लाख भारतीयों को वापस लाया जा चुका है। भारतीय नौसेना ने जहाजों की सुरक्षा के लिए अपने 5 युद्धपोत भी तैनात किए हैं।

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