अमेरिका का ईरान पर महाप्रहार: इस्फ़हान में गिराए 900 किलो के 'बंकर-बस्टर' बम
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब बेहद खतरनाक और डरावने मोड़ पर पहुंच गई है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे अहम शहर इस्फ़हान पर भारी-भरकम बम गिराकर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है, जिससे ग्लोबल इकॉनमी पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
{getToc} $title={Table of Contents}
जमीन के अंदर तक तबाही मचाने वाले बम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब यह लड़ाई एक नए स्तर पर जा चुकी है। अमेरिका ने ईरान के इस्फ़हान शहर में मौजूद हथियारों के गोदाम पर 2,000 पाउंड (करीब 900 किलो) के बड़े बम गिराए हैं। इन्हें 'बंकर-बस्टर' कहा जाता है क्योंकि ये जमीन के बहुत नीचे बने महफूज़ ठिकानों को भी आसानी से बर्बाद कर सकते हैं। इस्फ़हान ईरान के मिसाइल और परमाणु प्रोग्राम का दिल माना जाता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक खबर के मुताबिक, अमेरिका ने यह हमला करके ईरान को साफ संदेश दे दिया है कि अब उसके जमीन के अंदर छिपे ठिकाने भी सुरक्षित नहीं हैं। अमेरिका इस हमले के जरिए ईरान की सैन्य ताकत की कमर पूरी तरह तोड़ना चाहता है।
- लगातार धमाके: मुख्य हमले के बाद भूमिगत गोदाम में रखे भारी हथियारों में आग लग गई और कई घंटों तक रुक-रुक कर धमाके होते रहे।
- आसमान में आग: रात के अंधेरे में आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्हें सैटेलाइट कैमरों से भी साफ देखा गया।
- गहरी तबाही: इन 'पातालभेदी' बमों ने कंक्रीट की मोटी दीवारें तोड़कर अंदर तक भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई करना ईरान के लिए आसान नहीं होगा।
- चारों तरफ से घेराबंदी: इसी बीच इजरायल ने भी ईरान पर कुछ हमले किए हैं, जिससे ऐसा लग रहा है कि ईरान को पूरी प्लानिंग के साथ चारों तरफ से घेरा जा रहा है।
अमेरिका का सीधा अल्टीमेटम: सत्ता बदलो
इस बड़े हमले के पीछे अमेरिका का एक बड़ा राजनीतिक मकसद भी छिपा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस हमले से जुड़े कुछ वीडियो शेयर किए हैं। ट्रम्प प्रशासन अब सिर्फ हथियारों के गोदामों को खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि वह इस बात पर अड़ गया है कि ईरान में मौजूदा सरकार को ही बदल दिया जाए। ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान बातचीत के लिए एक 'नई और समझदार' सरकार लेकर नहीं आता है, तो उनका अगला निशाना ईरान के तेल और ऊर्जा के ठिकाने होंगे।
| ट्रम्प की मुख्य मांग | ईरान में एक नई सरकार का आना और नया समझौता करना। |
|---|
व्यापारिक रास्तों से ज्यादा 'सत्ता परिवर्तन' पर जोर
अमेरिका की रणनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले अमेरिका की हमेशा से यह कोशिश रहती थी कि दुनिया भर के व्यापार के लिए इस्तेमाल होने वाला समुद्री रास्ता यानी 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' हमेशा खुला रहे। लेकिन अब ट्रम्प का कहना है कि अगर यह रास्ता बंद रहता है तो रहे, उनकी पहली शर्त सिर्फ ईरान में नई सरकार का आना है।
| बदली हुई अमेरिकी रणनीति | समुद्री रास्ता भले ही बंद रहे, लेकिन ईरान पर सैन्य दबाव तब तक नहीं हटेगा जब तक वहां सत्ता न बदल जाए। |
|---|
राष्ट्रपति ट्रम्प इस सैन्य अभियान को तब भी जारी रखने के पक्ष में हैं, जब हॉर्मुज का महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद रहे। वे इस रास्ते को खोलने की चिंता बाद के लिए छोड़ने को तैयार हैं, बशर्ते ईरान में एक नई सरकार बन जाए।
- अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारीदुनिया भर के देशों की बढ़ी धड़कनें
जैसे-जैसे बमबारी तेज हो रही है, दुनिया भर के देशों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की जैसे पड़ोसी देश बुरी तरह घबराए हुए हैं और लगातार एक-दूसरे से बात कर रहे हैं ताकि इस आग को फैलने से रोका जा सके। भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने भी इसे एक 'बड़ी भूल' बताया है। उनका कहना है कि इस युद्ध से कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसकी भारी कीमत पूरी दुनिया की आम जनता को चुकानी पड़ रही है।
| वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर | तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के तनाव से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का भारी खतरा पैदा हो गया है। |
|---|
आगे क्या होगा?
- क्या आस-पास के देश मिलकर इस भयानक युद्ध को शांत करवा पाएंगे?
- क्या अमेरिका ईरान में सरकार बदलकर ही अपना अभियान रोकेगा?
- तेल के दाम बढ़ने से दुनिया भर के आम आदमी की जेब पर और कितना असर पड़ेगा?
- ईरान इस विनाशकारी हमले और दबाव का क्या जवाब देगा?
निष्कर्ष: एक अनिश्चित और खतरनाक भविष्य
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह युद्ध अब एक ऐसी जगह पहुँच गया है जहाँ से पीछे लौटना लगभग नामुमकिन सा लग रहा है। अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं है और ईरान अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। 2,000 पाउंड के बमों ने सिर्फ इस्फ़हान की ज़मीन को ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की सुरक्षा को हिला कर रख दिया है।
इस्फ़हान के आसमान में उड़ता हुआ धुएं का काला गुबार पूरी दुनिया को एक ही इशारा कर रहा है - आने वाले दिन शांति और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं।
दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी पूरी दुनिया को सुलगा सकती है।
अमेरिका ने ईरान के किस शहर को निशाना बनाया है?
अमेरिका ने ईरान के इस्फ़हान शहर पर हमला किया है। यह शहर ईरान के मिसाइल और परमाणु हथियारों के प्रोग्राम का मुख्य केंद्र माना जाता है।
'बंकर-बस्टर' बम क्या होते हैं?
ये बहुत भारी (करीब 900 किलो) और खास तरह के बम होते हैं। इन्हें इसलिए बनाया गया है ताकि ये कंक्रीट की मोटी परतों को तोड़कर जमीन के बहुत नीचे बने सुरक्षित और गुप्त ठिकानों को भी तबाह कर सकें।
डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान से सबसे बड़ी मांग क्या है?
ट्रम्प प्रशासन की सबसे बड़ी मांग यह है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो। वे चाहते हैं कि वहां एक नई सरकार आए जो अमेरिका के साथ शांति से बातचीत कर सके।
इस युद्ध का आम आदमी और दुनिया पर क्या असर हो रहा है?
इस युद्ध और तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का भारी खतरा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका ने क्या रणनीति बदली है?
पहले अमेरिका की हमेशा कोशिश रहती थी कि व्यापार के लिए यह समुद्री रास्ता खुला रहे। लेकिन अब अमेरिका ने अपनी यह पुरानी ज़िद छोड़ दी है। वह इस रास्ते के बंद रहने का नुकसान सहने को तैयार है, लेकिन ईरान की सत्ता बदलने की अपनी मांग से पीछे नहीं हट रहा।