ईरान में भारी उलटफेर: अब मौलवियों की जगह सेना के हाथ में देश की कमान, क्या होगा मिडिल-ईस्ट का भविष्य?
28 फरवरी के बड़े हमलों और अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद ईरान की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। अब सत्ता की चाबी सीधे तौर पर कट्टरपंथी सेना (IRGC) के जनरलों के पास है।
अमेरिका और इजरायल इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं, लेकिन इस्लामाबाद में होने वाली आगामी शांति वार्ता के बीच युद्ध का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है।
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ईरान में कैसे पलट गया सत्ता का खेल?
28 फरवरी को हुए जोरदार हमलों ने ईरान की पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया। देश के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का युग अब खत्म हो चुका है। करीब 40 दिनों तक चले भारी खून-खराबे के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम (ceasefire) का ऐलान किया है। लेकिन इस सन्नाटे के बीच ईरान की अंदरूनी राजनीति में एक बहुत बड़ा भूकंप आ गया है।
आसान शब्दों में कहें तो, ईरान की सत्ता अब पुराने धार्मिक नेताओं (मौलवियों) के हाथों से निकलकर सीधे 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के कट्टर कमांडरों के पास चली गई है। यह सिर्फ चेहरों का बदलाव नहीं है। पहले के नेता कूटनीति और बातचीत में थोड़ा लचीलापन दिखाते थे, लेकिन अब की सेना किसी भी समझौते को अपनी हार मानती है। ईरान अब बातचीत करने वाले देश से बदलकर एक आक्रामक 'सैन्य राष्ट्र' बन चुका है।
- कट्टरपंथ का नया दौर: नई लीडरशिप ऐसे कमांडरों से भरी है जो किसी भी तरह के समझौते के सख्त खिलाफ हैं।
- सेना का पूरा कब्जा: देश के पुराने धार्मिक वर्ग को अब किनारे कर दिया गया है और सारे अहम फैसले सेना ले रही है।
- खतरनाक आक्रामकता: नई सैन्य सरकार पहले से कहीं ज्यादा गुस्से में है और छोटे-मोटे युद्धों (proxy wars) को भड़काने में पीछे नहीं हटेगी।
- बातचीत में अड़चन: सेना पीछे हटने को अपनी बेइज्जती मानती है, जिससे शांति वार्ता बहुत मुश्किल हो गई है।
नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की एंट्री
खामेनेई के जाने के बाद जो जगह खाली हुई, उसे भरने में बिल्कुल भी देरी नहीं की गई। उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को देश का नया और तीसरा सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। वैसे तो मुजतबा बहुत पहले से ही पर्दे के पीछे रहकर सरकार चला रहे थे, लेकिन अब उनका खुलकर सामने आना यह बताता है कि ईरान के फैसले अब और भी कड़े होने वाले हैं। घायल होने की खबरों के बीच मुजतबा ने अपना पहला संदेश दिया और साफ कर दिया कि ईरान अपने हकों के लिए किसी भी हद तक जाएगा।
| नेतृत्व का दौर | शासन का तरीका |
|---|---|
| पुराना धार्मिक नेतृत्व | कूटनीति और समझौते की गुंजाइश (लचीलापन) |
| नया सैन्य नेतृत्व (IRGC) | सीधा टकराव और समझौते से साफ इनकार |
अमेरिका और इजरायल का रुख और जमीनी तबाही
पश्चिमी देश और अमेरिका इसे 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) का नाम दे रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे एक बहुत सफल बदलाव भी बता दिया है। लेकिन जमीन पर सच्चाई कुछ और ही है। ईरान का सिस्टम टूटा नहीं है, बल्कि वह एक खतरनाक सैन्य छावनी में बदल गया है। इस दौरान इजरायल ने ईरान पर जमकर बमबारी की है। हमलों ने ईरान के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है, जिससे दुनियाभर में तेल की सप्लाई पर भी खतरा मंडरा रहा है।
| इजरायली हमलों के आंकड़े | विवरण |
|---|---|
| हवाई हमले और सॉर्टियाँ | 1,000 से ज्यादा हमले और 8,500 उड़ानें |
| गिराए गए बम | ईरान पर 13,000 से ज्यादा बम गिराए गए |
"ईरान के नागरिकों—फारसियों, कुर्दों, अजरियों, अहवाज़ियों और बलूचियों—अब समय आ गया है कि आप इस आतंक के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट हों। जिसकी आपने प्रतीक्षा की थी, वह सहायता अब आ चुकी है।"
— बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायल के प्रधानमंत्रीइस्लामाबाद में बातचीत: क्या निकलेगा कोई हल?
अभी जो दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ है, वह पक्की शांति नहीं बल्कि सिर्फ एक छोटा सा 'ब्रेक' लग रहा है। इसी बीच, शनिवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक बड़ी बैठक होने वाली है। इसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉर्क हिस्सा लेंगे। वहीं ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबाफ के आने की उम्मीद है। हालांकि, इजरायल को इस बातचीत पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।
| मुख्य मुद्दे | बातचीत का विषय और चुनौतियां |
|---|---|
| हॉर्मुज जलडमरूमध्य | समुद्री सुरंगों का खतरा और तेल ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षा। |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पर रोक लगाना। |
इजरायली खुफिया एजेंसी की मुख्य चिंताएं
- नया ईरानी शासन कूटनीति से ज्यादा सीधी जंग पर भरोसा कर रहा है।
- लगातार हमलों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल सप्लाई चेन खतरे में है।
- इजरायल ने एहतियात के तौर पर अपने 4 लाख रिजर्व सैनिकों की ड्यूटी 14 मई तक बढ़ा दी है।
- बीच का कोई भी रास्ता निकालना अब नामुमकिन सा लग रहा है।
निष्कर्ष: एक खतरे वाली शांति
कुल मिलाकर, आज दुनिया के सामने एक ऐसा ईरान खड़ा है जो इतने हमलों और अपने सबसे बड़े नेता को खोने के बाद भी पहले से ज्यादा जिद्दी और खतरनाक हो गया है। इजरायली एक्सपर्ट बोआज बिसमुथ ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हमले फिर से शुरू हो सकते हैं। इसका मतलब है कि अभी जो शांति दिख रही है, वह बहुत कच्ची है।
लगातार हुई बमबारी ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह तोड़ दिया है और एक ऐसा संकट खड़ा कर दिया है जिसका हल बातचीत की मेज पर फिलहाल तो नहीं दिख रहा। अगर जल्दी कोई रास्ता नहीं निकाला गया, तो इस युद्ध की आग पूरे मिडिल-ईस्ट के साथ-साथ दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को जला कर राख कर देगी।
क्या आपको लगता है कि इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होगा?
ईरान का नया सुप्रीम लीडर कौन है?
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया और तीसरा सुप्रीम लीडर बनाया गया है।
IRGC क्या है और अब इसका क्या रोल है?
IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ईरान की एक बेहद ताकतवर सैन्य फोर्स है। अब देश की असली सत्ता और बड़े फैसले लेने की ताकत पुराने धार्मिक नेताओं से छिनकर इसी फोर्स के जनरलों के पास आ गई है।
इजरायल ने ईरान पर कितने हमले किए हैं?
हालिया संघर्ष में इजरायली वायुसेना ने ईरान पर 1,000 से ज्यादा हवाई हमले किए और 13,000 से ज्यादा बम गिराए हैं, जिससे वहां का बुनियादी ढांचा काफी तबाह हुआ है।
इस्लामाबाद वार्ता में कौन-कौन शामिल हो रहा है?
इस शांति वार्ता में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉर्क शामिल होंगे, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ के आने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालात पर क्या कहा है?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में खामेनेई की मौत और नए बदलाव को एक "सफल सत्ता परिवर्तन" (Regime Change) बताया है और युद्धविराम की घोषणा की है।