ट्रंप के 'चहेते' और एजेंसियों के लिए 'खतरा': पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर और ईरान का पेचीदा रिश्ता
एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तारीफों के पुल बांध रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उन्हें एक बड़े खतरे के रूप में देख रही हैं।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही कूटनीति में मुनीर एक अहम मोहरा तो बन गए हैं, लेकिन ईरान के साथ उनके पुराने और गहरे रिश्ते अमेरिका की नींद उड़ा रहे हैं। आइए समझते हैं यह पूरा मामला क्या है।
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ईरान से मुनीर की पुरानी और गहरी दोस्ती
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है और इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर बीच-बचाव कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों की मानें तो, मुनीर के ईरान के बड़े सैन्य अधिकारियों से काफी गहरे संबंध हैं और ये रिश्ते केवल काम-काज तक सीमित नहीं हैं।
ये रिश्ते कोई नए नहीं हैं, बल्कि तब के हैं जब मुनीर 2016-17 में पाकिस्तान के खुफिया विभाग (DGMI) के प्रमुख थे। अमेरिकी एजेंसियों को डर है कि मुनीर निष्पक्ष रहने के बजाय छुपकर ईरान का ही साथ दे सकते हैं। मुनीर के संपर्कों में ये नाम सबसे ऊपर हैं:
- कासिम सुलेमानी: कुद्स फोर्स के पूर्व कमांडर (जो 2020 में मारे गए), जिनसे मुनीर की काफी पक्की दोस्ती बताई जाती है।
- हुसैन सलामी: ईरान की सेना (IRGC) के बड़े कमांडर, जो मुनीर से सीधे संपर्क में रहे हैं।
- IRGC (ईरानी सेना): ईरान की इस ताकतवर सैन्य टुकड़ी के साथ मुनीर का पुराना तालमेल अमेरिका को सबसे ज्यादा खटक रहा है।
- ईरानी नेतृत्व: मुनीर का ईरान के आला अधिकारियों के साथ पेशेवर से ज्यादा व्यक्तिगत और दोस्ताना जुड़ाव रहा है।
ट्रंप का भरोसा बनाम खुफिया एजेंसियों का डर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे 'ताकतवर' सैन्य नेताओं से डील करना पसंद है। ट्रंप मुनीर को अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' कहते हैं और उनके जरिए ईरान से बातचीत कर रहे हैं। लेकिन, अमेरिका के खुफिया विभाग को यह बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।
| ट्रंप का नजरिया: मुनीर एक 'भरोसेमंद' और बेहतरीन साथी हैं। | खुफिया विभाग की चिंता: मुनीर एक 'अविश्वसनीय' और जोखिम भरे इंसान हैं। |
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अमेरिका का पुराना कड़वा अनुभव
मुनीर पर इस शक की एक और बड़ी वजह पाकिस्तान का पुराना रिकॉर्ड है। अमेरिका अभी तक अफगानिस्तान युद्ध में पाकिस्तान के डबल गेम को भूला नहीं है, जब इस्लामाबाद ने अमेरिका से करोड़ों डॉलर भी लिए और तालिबान को भी अपने यहां पनाह दी।
| पाकिस्तान का इतिहास: एक 'धोखेबाज सहयोगी' जिसने हमेशा फायदा उठाया। | वर्तमान रणनीति: मुनीर भी दोनों तरफ से फायदा उठाने वाली कूटनीति खेल रहे हैं। |
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"मुनीर का ईरान की मिलिट्री (IRGC) के साथ पुराना और गहरा रिश्ता अमेरिका के लिए किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।"
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टपाकिस्तान में सेना का एकछत्र राज
आज के समय में पाकिस्तान की पूरी सत्ता वहां की सेना यानी रावलपिंडी के हाथों में आ चुकी है। मुनीर के नेतृत्व में सेना ने वहां की चुनी हुई नागरिक सरकार को पूरी तरह किनारे कर दिया है। 2022 के बाद से विपक्ष को कुचल दिया गया है और सारे अहम फैसले जनरल ही ले रहे हैं।
| नागरिक सरकार: पाकिस्तान में लोकतंत्र केवल नाम मात्र का रह गया है। | सेना का नियंत्रण: देश की विदेशी नीति और सत्ता पूरी तरह से मुनीर के कब्जे में है। |
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अमेरिका के लिए सबसे बड़ी खतरे की घंटी
- मुनीर का काम करने का तरीका पूरी तरह से 'लेन-देन' पर टिका है, जो वाशिंगटन के लिए एक बड़ा 'रेड फ्लैग' है।
- बोलने की आजादी पर पाबंदी लगाने जैसे उनके बयान उनकी तानाशाही सोच को दिखाते हैं।
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पाकिस्तान वार्ता से बीच में ही उठकर चले जाना इसी अविश्वास और गुस्से का नतीजा था।
- अमेरिका अब एक ऐसे देश से बातचीत कर रहा है जहां लोकतंत्र नहीं, बल्कि सिर्फ एक जनरल का हुक्म चलता है।
निष्कर्ष: एक 'रिस्की' मध्यस्थ
जनरल असीम मुनीर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां वे या तो अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक पुल बन सकते हैं, या फिर अमेरिका के लिए गले की हड्डी साबित हो सकते हैं। ट्रंप उन पर काफी दांव लगा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी एजेंसियां लगातार खतरे का सायरन बजा रही हैं।
अगर यह साबित हो गया कि मुनीर अंदर ही अंदर ईरान की तरफ झुके हुए हैं, तो इससे न सिर्फ उनका अपना करियर खतरे में पड़ेगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है। फिलहाल, वो एक ऐसे मध्यस्थ हैं जिन पर ट्रंप ने जुआ खेला है, पर उनकी अपनी ही टीम इस फैसले से डरी हुई है।
यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जनरल मुनीर अमेरिका से अपनी दोस्ती और ईरान से अपने पुराने रिश्तों के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियां असीम मुनीर को खतरा क्यों मान रही हैं?
क्योंकि मुनीर के ईरान के सैन्य संगठन (IRGC) और वहां के बड़े कमांडरों के साथ काफी पुराने और गहरे रिश्ते रहे हैं। एजेंसियों को डर है कि वे ईरान के लिए काम कर सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का असीम मुनीर के बारे में क्या सोचना है?
राष्ट्रपति ट्रंप मुनीर को बहुत पसंद करते हैं। वे उन्हें अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' और एक बहुत ही भरोसेमंद सहयोगी मानते हैं।
जेडी वेंस पाकिस्तान में हो रही वार्ता को छोड़कर क्यों चले गए थे?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इस बातचीत में मुनीर की भूमिका को लेकर अमेरिकी प्रशासन में फैले अविश्वास के कारण उपराष्ट्रपति वेंस बीच मीटिंग से ही उठकर चले गए थे।
पाकिस्तान को अमेरिका का 'धोखेबाज सहयोगी' क्यों कहा जाता है?
अफगानिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका से काफी पैसे लिए, लेकिन पीठ पीछे उसने तालिबान का समर्थन भी किया। इसी दोगलेपन के कारण उसे धोखेबाज कहा जाता है।
पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति कैसी है?
वहां चुनी हुई सरकार की ताकत खत्म हो चुकी है। सत्ता, विदेशी फैसले और राजनीति—सब कुछ पूरी तरह से आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर के कंट्रोल में है।