ईरान में 46 घंटे चला अमेरिका का सबसे खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन: जानें इस खौफनाक रात की पूरी कहानी
कैसे अमेरिकी कमांडो ने ईरान की सरहद में घुसकर अपने फंसे हुए जवान को बचाया, और इसके लिए वाशिंगटन में 46 घंटे तक कैसे धड़कती रहीं अधिकारियों की सांसें।
इस जानलेवा ऑपरेशन में अमेरिका को अपने ही करोड़ों के विमान क्यों खाक करने पड़े? आइए, इस पूरी घटना को बेहद आसान भाषा में समझते हैं।
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वाशिंगटन में 46 घंटे तक थमी रहीं सांसें
दोस्तों, जरा सोचिए! एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन जो ऐसे दुश्मन के गढ़ में हो रहा हो, जिसके साथ भयंकर युद्ध चल रहा हो। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इसी जंग के बीच अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने एक बेहद ही दुस्साहसिक काम कर दिखाया है। यह सिर्फ एक सैनिक को बचाने की बात नहीं थी, बल्कि यह आज के दौर का सबसे लंबा 'कोऑर्डिनेशन कॉल' (लगातार संपर्क में रहना) बन गया।
शुक्रवार को जब अमेरिका का F-15E फाइटर जेट गिराया गया, तो वाशिंगटन के कंट्रोल रूम में हलचल मच गई। तुरंत एक हाई-सिक्योरिटी रूम में मीटिंग शुरू हुई, जो बिना पलक झपकाए पूरे 45 घंटे और 56 मिनट तक चालू रही। इस दौरान व्हाइट हाउस और पेंटागन के बड़े-बड़े अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़का सकती थी।
- डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका के राष्ट्रपति, जो खुद इस मिशन के हर कदम पर नजर रखे हुए थे और अपनी मंजूरी दे रहे थे।
- पीट हेगसेथ: रक्षा मंत्री, जिन्होंने पूरी रणनीति और कूटनीति की बागडोर संभाली हुई थी।
- जॉन रैटक्लिफ: सीआईए (CIA) चीफ, जो ईरान के अंदर से खुफिया जानकारी और पल-पल की अपडेट जुटा रहे थे।
- जनरल डैन केन: वायुसेना के बड़े अधिकारी, जो मैदान पर मौजूद कमांडो को निर्देश दे रहे थे।
रात के अंधेरे में पहाड़ों पर चला ऑपरेशन
इस खतरनाक मिशन को अंजाम देने के लिए करीब 100 जांबाज अमेरिकी कमांडो को गुपचुप तरीके से ईरान में उतारा गया। विमान का पायलट तो शुक्रवार को ही सुरक्षित मिल गया था, लेकिन उसका दूसरा साथी (वेपन्स सिस्टम ऑफिसर) घायल हालत में ईरानी इलाके में फंसा रह गया था।
| रेस्क्यू की जगह | तेहरान के दक्षिण में 7,000 फीट ऊंची बर्फीली और दुर्गम चोटी |
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खुद ही जलाने पड़े अपने करोड़ों के विमान
कमांडो ने रात के घुप अंधेरे का फायदा उठाकर रडार को चकमा दिया और जवान तक पहुंच गए। लेकिन असली मुसीबत तो वापसी के वक्त आई। रेस्क्यू टीम जैसे ही निकलने वाली थी, अमेरिका के दो बड़े और बेहद महंगे ट्रांसपोर्ट विमानों (MC-130) में तकनीकी खराबी आ गई। अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ा डर यह था कि अगर ये विमान ईरान के हाथ लग गए, तो उनकी खुफिया तकनीक लीक हो जाएगी।
| नष्ट किए गए विमान | 2 ट्रांसपोर्ट प्लेन (MC-130) और 4 हेलिकॉप्टर (ब्लैक हॉक सहित) |
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"यह कोई रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि अमेरिका इस बहाने हमारा यूरेनियम चुराने आया था। यह उनका एक सफेद झूठ है।"
इस्माइल बक़ाई (प्रवक्ता, ईरानी विदेश मंत्रालय)ईरान का पलटवार और अमेरिका पर चुनाव का दबाव
ईरान ने अमेरिका के इस बहादुरी के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका जिस जगह का नाम बता रहा है, वहां तो ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। उनका दावा है कि अमेरिका असल में संवर्धित यूरेनियम चुराने की फिराक में था। वहीं दूसरी तरफ, इस जंग का सीधा असर अब अमेरिका के आम लोगों पर भी पड़ने लगा है।
| अर्थव्यवस्था पर असर | कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, जिससे ट्रंप सरकार की टेंशन बढ़ गई है। |
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इस पूरे मिशन की 4 बड़ी बातें
- यह ऑपरेशन आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे और तनावपूर्ण रेस्क्यू मिशन में से एक बन गया है (45 घंटे 56 मिनट)।
- कमांडो को एक बार में नहीं, बल्कि कई किश्तों में वापस लाया गया, जिससे उनकी जान पर घंटों तक खतरा मंडराता रहा।
- अमेरिका को अपनी 'स्कॉर्च्ड अर्थ' नीति के तहत अपने ही विमानों और हेलिकॉप्टरों को बम से उड़ाना पड़ा।
- इस घटना ने अमेरिका के मिडटर्म चुनावों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि युद्ध का खर्च जनता की जेब पर भारी पड़ रहा है।
आगे क्या होगा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया है कि उनका बचाया गया सैनिक अब बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन, इस मिशन ने मध्य-पूर्व की आग में मानो घी डालने का काम किया है। शांति की जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वो भी अब धुंधली हो गई है।
रात 8 बजे की 'हॉर्मुज़ डेडलाइन' जैसे-जैसे करीब आ रही है और तेहरान में धमाकों की खबरें तेज हो रही हैं, पूरी दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि यह तनाव अब कौन सा नया मोड़ लेगा। यह मिशन अमेरिका के लिए बहादुरी की मिसाल जरूर है, लेकिन इसने दुनिया को एक बड़े खतरे के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
देखते हैं आने वाले दिनों में यह युद्ध क्या नया रूप लेता है। पल-पल की और आसान भाषा में न्यूज़ अपडेट्स के लिए हमारे साथ जुड़े रहें!
यह रेस्क्यू ऑपरेशन कितने घंटे तक चला?
यह ऑपरेशन रिकॉर्ड 45 घंटे और 56 मिनट तक चला, जिस दौरान वाशिंगटन में कंट्रोल रूम लगातार एक्टिव रहा।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस मिशन का लक्ष्य ईरान की सीमा में गिरे अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के फंसे हुए जवान को सुरक्षित वापस लाना था।
अमेरिका ने अपने ही विमान क्यों तबाह कर दिए?
रेस्क्यू के वक्त अमेरिकी विमानों (MC-130) में खराबी आ गई थी। अमेरिका नहीं चाहता था कि उसकी सीक्रेट और महंगी तकनीक दुश्मन (ईरान) के हाथ लगे, इसलिए उन्होंने खुद ही उन्हें मलबे में बदल दिया।
ईरान ने इस ऑपरेशन पर क्या प्रतिक्रिया दी ক্ষমতায় है?
ईरान ने इसे पूरी तरह से झूठ बताया है। उनका दावा है कि अमेरिका रेस्क्यू के बहाने उनका यूरेनियम चुराने की साजिश रच रहा था।
इस जंग का अमेरिका की आम जनता पर क्या असर हो रहा है?
युद्ध की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले चुनावों में ट्रंप सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।