इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: डेटा संप्रभुता, ब्रेन ड्रेन और अमेरिकी एआई स्टैक पर बड़ी बहस
नई दिल्ली में 'संप्रभु एआई' पर केंद्रित इस शिखर सम्मेलन ने व्हाइट हाउस के सलाहकार श्रीराम कृष्णन के बयानों से एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक विवाद को जन्म दिया।
नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' भारत के तकनीकी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में उभरा है। जहाँ यह शिखर सम्मेलन 'संप्रभु एआई' (Sovereign AI) पर केंद्रित है, वहीं अमेरिकी व्हाइट हाउस के सलाहकार श्रीराम कृष्णन के बयानों ने एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक विवाद को जन्म दे दिया है। कृष्णन द्वारा भारत सहित सहयोगियों को "अमेरिकी एआई स्टैक और बुनियादी ढांचे" का उपयोग करने के आह्वान को विपक्षी दलों ने "डेटा साम्राज्यवाद" की संज्ञा दी है। साथ ही, ज़ोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने इस स्थिति को "प्रतिभा पलायन" (Brain Drain) के गंभीर परिणाम के रूप में रेखांकित किया है।
{getToc} $title={Table of Contents}मुख्य विषय और विश्लेषण
डेटा संप्रभुता और "डेटा साम्राज्यवाद" का विवाद
शिखर सम्मेलन के दौरान व्हाइट हाउस के एआई सलाहकार श्रीराम कृष्णन के बयानों ने भारत की डिजिटल संप्रभुता पर बहस छेड़ दी है।
- अमेरिकी रुख: कृष्णन ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया और उसके सहयोगी देश, जिनमें भारत भी शामिल है, अमेरिकी एआई मॉडल, बुनियादी ढांचे और एआई स्टैक (AI Stack) का लाभ उठाएं।
- राजनीतिक विरोध: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे भारत की सामरिक स्वायत्तता से समझौता बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को अमेरिका का "क्लाइंट स्टेट" (Client State) बनाया जा रहा है।
- डेटा कॉलोनी का जोखिम: विपक्ष ने लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा दी गई चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि यदि डेटा और डिजिटल व्यापार पर कड़ाई से बातचीत नहीं की गई, तो भारत एक "डेटा कॉलोनी" बनकर रह जाएगा।
प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और इसके आर्थिक निहितार्थ
ज़ोहो के सीईओ श्रीधर वेम्बु ने श्रीराम कृष्णन (जो स्वयं भारतीय मूल के हैं) का उदाहरण देते हुए भारत में प्रतिभा को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।
- बौद्धिक संपदा का नुकसान: वेम्बु के अनुसार, भारत की शीर्ष प्रतिभाओं का विदेशी सरकारों के लिए नीति निर्धारण करना यह दर्शाता है कि प्रतिभा पलायन देश के लिए कितना महंगा साबित हो रहा है।
- स्वदेशी तकनीक की आवश्यकता: वेम्बु ने एक 'भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम' जैसे घरेलू तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन का आह्वान किया है।
| विवरण | सांख्यिकीय डेटा |
| विदेशी छात्र बनाम भारतीय छात्र अनुपात | भारत आने वाले हर 1 विदेशी छात्र के मुकाबले 25 भारतीय छात्र बाहर जाते हैं। |
| 2024 में बाहर जाने वाले छात्र | 13.36 लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। |
| H-1B वीजा में हिस्सेदारी | कुल H-1B वीजा धारकों में लगभग 71% भारतीय हैं। |
| 2024 में भारतीयों को प्राप्त H-1B वीजा | 2,83,397 |
अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध और व्यापारिक दौरे
शिखर सम्मेलन से इतर, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया, जो तकनीकी और रक्षा सहयोग को गहरा करने का संकेत देता है।
- बेंगलुरु दौरा: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अमेरिकी अवर सचिव विलियम किमिट ने बेंगलुरु में शेवरॉन इंजन, गूगल डीपमाइंड और बायोकॉन जैसी कंपनियों के साथ बैठकें कीं।
- रणनीतिक साझेदारी: किमिट और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल पपारो ने उभरती प्रौद्योगिकियों में रक्षा सहयोग पर चर्चा की। इसका उद्देश्य अमेरिकी एआई निर्यात को बढ़ावा देना और नए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।
बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय चुनौतियां
एआई की दौड़ में भारत डेटा केंद्रों (Data Centres) पर बड़ा दांव लगा रहा है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर पर्यावरणीय चिंताएं भी जुड़ी हैं।
- जल खपत का संकट: डेटा केंद्रों को संचालित करने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। एक अनुमान के अनुसार, ये केंद्र प्रतिदिन 18 लाख लीटर तक पानी की खपत कर सकते हैं।
- संसाधन प्रबंधन: ऐसे देश में जहाँ प्रमुख शहरों में पानी की कमी एक स्थायी समस्या है, वहां एआई बुनियादी ढांचे का विस्तार जल सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश करता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण
निष्कर्ष
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने स्पष्ट कर दिया है कि एआई केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक उपकरण है। भारत के लिए चुनौती केवल एआई को अपनाने की नहीं है, बल्कि इसे इस तरह से विकसित करने की है कि राष्ट्रीय हित, डेटा सुरक्षा और घरेलू प्रतिभा का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समिट का उद्देश्य भारत में 'Sovereign AI' यानी स्वदेशी एआई ढांचे को बढ़ावा देना, डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करना और वैश्विक एआई साझेदारी पर रणनीतिक चर्चा करना है。
अमेरिकी एआई स्टैक विवाद क्या है?
व्हाइट हाउस के एआई सलाहकार द्वारा सहयोगी देशों से अमेरिकी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर अपनाने के आह्वान के बाद भारत में "डेटा साम्राज्यवाद" की बहस छिड़ गई। विपक्ष ने इसे भारत की सामरिक स्वायत्तता से जुड़ा मुद्दा बताया है।
डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) क्यों महत्वपूर्ण है?
डेटा संप्रभुता का अर्थ है कि किसी देश का डेटा उसी देश के कानूनों के तहत सुरक्षित रहे। एआई युग में यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नियंत्रण और डिजिटल स्वतंत्रता से जुड़ा अहम विषय बन चुका है।
ब्रेन ड्रेन का एआई सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय प्रतिभाओं का विदेशों में नीति निर्धारण और तकनीकी विकास में योगदान भारत की बौद्धिक संपदा और नवाचार क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
क्या भारत अमेरिकी एआई मॉडल पर निर्भर हो जाएगा?
यह भारत की नीतियों और स्वदेशी तकनीकी निवेश पर निर्भर करेगा। यदि घरेलू एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता नहीं दी गई तो तकनीकी निर्भरता बढ़ सकती है।