रूस-यूक्रेन शांति वार्ता: 4 सबसे चौंकाने वाले खुलासे जो युद्ध का रुख बदल सकते हैं

रूस-यूक्रेन युद्ध के 1,444 दिन—यानी लगभग चार वर्षों की रक्तपात और वैश्विक अस्थिरता के बाद—अबू धाबी के कूटनीतिक गलियारों से शांति की पहली ठोस आहट सुनाई दे रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की मध्यस्थता और अमेरिका के कूटनीतिक हस्तक्षेप के बीच पर्दे के पीछे कुछ ऐसा घटित हो रहा है, जो केवल युद्ध विराम नहीं, बल्कि एक नए वैश्विक सामरिक संतुलन (Strategic Balance) की ओर इशारा करता है।

एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में, मैंने दशकों तक भू-राजनीतिक दांव-पेंच देखे हैं, लेकिन वर्तमान वार्ता में हुए खुलासे इस संघर्ष के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं।

Russia Ukraine Peace Talks

1. सैन्य-से-सैन्य संवाद की बहाली: 'राप्र्रोचमेंट' का सामरिक सुरक्षा जाल

इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल युद्ध विराम की चर्चा नहीं, बल्कि अमेरिका और रूस के बीच 'उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद' (Military-to-Military dialogue) की बहाली है। गौरतलब है कि 2021 में यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण से ठीक पहले इस संवाद को निलंबित कर दिया गया था। अब, यूएस यूरोपियन कमांड के जनरल एलेक्सस ग्रिनकेविच (General Alexus Grynkewich) की भागीदारी ने इस द्विपक्षीय गतिरोध (Bilateral Deadlock) को तोड़ दिया है।

यह संवाद बहाली दरअसल उस 'परमाणु सुरक्षा जाल' का आधार है, जो किसी भी 'गलत गणना' (Miscalculation) को रोकने के लिए अनिवार्य है। यूएस यूरोपियन कमांड ने स्पष्ट किया है:

"सैन्य संवाद वैश्विक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है... यह पारदर्शिता बढ़ाने और तनाव कम करने का एक साधन है। यह चैनल दोनों पक्षों के बीच किसी भी अनपेक्षित सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक निरंतर संपर्क बिंदु प्रदान करेगा।"

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संवाद उस 'न्यू स्टार्ट' (New START) संधि को बचाने की पहली सीढ़ी है, जो विनाशकारी परमाणु हथियारों की होड़ को नियंत्रित करती है।

2. 55,000 सैनिकों की शहादत: एक स्तब्ध करने वाली स्वीकारोक्ति

युद्ध में अक्सर आंकड़ों को छिपाया जाता है, लेकिन राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने पहली बार एक ऐसी 'शॉक वैल्यू' पेश की जिसने वार्ता की मेज पर गंभीरता बढ़ा दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि 2022 से अब तक 55,000 यूक्रेनी सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए हैं।

यह खुलासा केवल एक सांख्यिकी नहीं, बल्कि यूक्रेन की ओर से यह संदेश है कि अब 'मानवीय कीमत' उसकी बर्दाश्त के बाहर हो रही है। यही वह भारी क्षति है जिसने कीव को अपनी 'यथास्थिति' (Status Quo) से हटकर अमेरिका के नेतृत्व वाली इस मध्यस्थता में शामिल होने के लिए मजबूर किया है।


3. कैदियों की अदला-बदली और आर्थिक दबाव का गणित

अबू धाबी में हुए 157-157 युद्धबंदियों (POWs) के आदान-प्रदान को महज एक मानवीय कृत्य समझना भूल होगी। यह कूटनीति का वह 'मूर्त परिणाम' (Tangible result) है, जिसके पीछे गहरे आर्थिक हित छिपे हैं। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) के अनुसार, रूस की तेल कंपनियों—रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil)—पर लगे कड़े प्रतिबंधों ने मॉस्को को बातचीत के लिए विवश किया है।

इस विनिमय के महत्वपूर्ण आंकड़े और कूटनीतिक बारीकियां:

  • 157-157 का आदान-प्रदान: स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर की निगरानी में हुआ यह सफल विनिमय विश्वास-बहाली की दिशा में बड़ा कदम है।
  • 19 'लाइफर्स' की रिहाई: रूस ने उन 19 यूक्रेनियनों को मुक्त किया जो उम्रकैद की सजा काट रहे थे, जिसे एक बड़ी कूटनीतिक रियायत माना जा रहा है।
  • आर्थिक कार्यसमूह: रूसी वार्ताकार किरिल दिमित्रीव ने पुष्टि की है कि अमेरिका-रूस आर्थिक कार्यसमूह के माध्यम से संबंधों को पुनर्जीवित करने पर सक्रिय चर्चा चल रही है।
  • यूक्रेन का पक्ष: यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार रुस्तम उमेरोव (Rustem Umerov) ने इसे "सच्चा रचनात्मक संवाद" करार दिया है।

4. न्यू स्टार्ट (New START) की समाप्ति और परमाणु शून्यता का खतरा

दुनिया इस समय 50 वर्षों में पहली बार एक ऐसी 'परमाणु शून्यता' की दहलीज पर खड़ी है जहाँ कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं होगा। 'न्यू स्टार्ट' संधि, जो रणनीतिक परमाणु हथियारों को 1,550 वारहेड्स तक सीमित करती है, अपनी समाप्ति (5 फरवरी, 2026) के बेहद करीब है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे "खराब तरीके से की गई डील" बताते हुए एक नए और आधुनिक समझौते का आह्वान किया है। एक्सिओस (Axios) की रिपोर्ट बताती है कि अबू धाबी में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि यदि परमाणु हथियारों पर नियंत्रण का कानूनी ढांचा ढह गया, तो दुनिया एक ऐसी 'शून्य-परिणामी खेल' (Zero-sum game) में उलझ जाएगी, जिससे वापसी असंभव होगी।

--------------------------------------------------------------------------------

कूटनीति का विरोधाभास: मेज पर हाथ, जमीन पर ड्रोन

अबू धाबी के वातानुकूलित कमरों में जब वार्ताकार "सकारात्मक दिशा" की बात कर रहे थे, उसी समय युद्ध की विभीषिका ने अपना वीभत्स चेहरा फिर दिखाया। रूस ने कीव पर 183 ड्रोन से हमला किया, जिसमें से यूक्रेन ने 156 को मार गिराया, लेकिन ऊर्जा ढांचे को भारी क्षति पहुँची।

सबसे हृदयविदारक विरोधाभास पूर्वी शहर ड्रुज़किव्का (Druzhkivka) में दिखा, जहाँ एक भीड़भाड़ वाले बाजार पर क्लस्टर युद्ध सामग्री (Cluster Munitions) से हमला हुआ, जिसमें 81 वर्ष तक के बुजुर्गों सहित 7 नागरिक मारे गए। यह कूटनीतिक प्रगति बनाम युद्ध की जमीनी सच्चाई के बीच की उस गहरी खाई को दर्शाता है, जिसे पाटना अभी बाकी है।

यह भी पढ़ें:- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: क्या भारत ने अपनी 'कृषि और थाली' को बचा लिया?

निष्कर्ष: स्थायी शांति या सामरिक विराम?

अबू धाबी की वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत का दौर अब अमेरिका में स्थानांतरित होने वाला है। हालांकि, डोनेट्स्क क्षेत्र की सीमाओं को लेकर अभी भी 'डेडलॉक' बना हुआ है, जिसे सुलझाना रुस्तम उमेरोव और रूसी प्रतिनिधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

एक विशेषज्ञ के तौर पर, अंत में मेरा सवाल आपसे यही है: क्या यह संवाद वास्तव में एक स्थायी शांति की नींव रख रहा है, या यह केवल दोनों पक्षों के लिए अपनी सैन्य और आर्थिक शक्ति को पुनः संचित करने का एक चतुर 'रणनीतिक विराम' (Strategic Pause) मात्र है?

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने