बाड़मेर के किसी सुदूर गांव में बैठा एक पिता जब अपने बेटे के हाथ में नया टैबलेट देखता है या सड़क हादसे में घायल किसी अजनबी को देखकर कोई राहगीर घबराने के बजाय 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाने की हिम्मत जुटाता है, तब बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह जाता। राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा पेश किया गया ₹21.52 लाख करोड़ का बजट इसी मानवीय बदलाव की एक महत्वाकांक्षी पटकथा है। पिछले वर्ष की तुलना में 41.39% की ऐतिहासिक वृद्धि वाला यह बजट केवल सरकारी खर्च का विवरण नहीं है, बल्कि यह 'विकसित राजस्थान @2047' के विजन की ओर एक निर्णायक प्रस्थान (Pivoting) है।
वरिष्ठ नीति विश्लेषक के तौर पर, मैं इस बजट को केवल प्रशासनिक सूचियों के रूप में नहीं, बल्कि उन क्रांतिकारी परिवर्तनों के रूप में देखता हूँ जो राजस्थान के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को जड़ से बदलने का माद्दा रखते हैं। आइए, इस 'ऐतिहासिक' पिटारे की 7 सबसे प्रभावशाली बातों का गहराई से विश्लेषण करें।
1. बिना कागजात के मुफ्त इलाज: 'राज सुरक्षा' और मानवीय दृष्टिकोण
अक्सर 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के तुरंत बाद का कीमती समय) में जान बचाने से ज्यादा समय जन आधार या अन्य दस्तावेजों को ढूंढने में नष्ट हो जाता था। 'राज सुरक्षा' (RAJ-SURAKSHA) योजना के माध्यम से सरकार ने 'कागजी कार्रवाई बनाम जीवन' के पुराने प्रशासनिक अवरोध को समाप्त करने का साहसिक निर्णय लिया है। विश्लेषक की दृष्टि में, यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को 'प्रक्रिया-प्रधान' से हटाकर 'परिणाम-प्रधान' (Outcome-oriented) बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना और 'राज सुरक्षा' के प्रमुख लाभ:
- दस्तावेजों की बाध्यता खत्म: आपातकालीन स्थिति में जन आधार या पहचान पत्र न होने पर भी उपचार सुनिश्चित।
- कैशलेस और त्वरित उपचार: एक्सीडेंट केस में निजी व सरकारी अस्पतालों में बिना किसी देरी के मुफ्त इलाज।
- 24x7 कमांड सेंटर: एम्बुलेंस और नजदीकी अस्पताल की सटीक लोकेशन के लिए सक्रिय निगरानी।
"हमारा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी या कागजों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। 'स्वस्थ राजस्थान-समृद्ध राजस्थान 2047' के संकल्प के साथ हम हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में लाएंगे।" — वित्त मंत्री का विजन
--------------------------------------------------------------------------------
2. ड्राइविंग लाइसेंस के लिए CPR ट्रेनिंग अनिवार्य: एक सामाजिक क्रांति
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने एक अत्यंत लीक से हटकर फैसला लिया है। अब राजस्थान में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) प्राप्त करने के लिए CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन - हृदय और फेफड़ों को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया) प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।
नीतिगत नजरिए से, यह केवल एक प्रशासनिक नियम नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (प्रथम उत्तरदाता) बनाने की दिशा में एक बड़ा सामाजिक बदलाव है। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि नागरिक व्यवहार (Behavioral Change) में सुधार लाकर मृत्यु दर कम करना चाहती है।
--------------------------------------------------------------------------------
3. मानसिक स्वास्थ्य पर 'राज ममता' का प्रहार: स्कूलों में अब काउंसलर
कोटा के कोचिंग छात्रों में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या के संवेदनशील मामलों को देखते हुए, सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को 'टैबू' (वर्जना) से हटाकर मुख्य बजट का हिस्सा बनाया है। इसके लिए ₹150 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया गया है। विश्लेषक की दृष्टि में, यह निवेश 'उपचार' से 'बचाव' (Prevention) की ओर एक महत्वपूर्ण शिफ्ट है।
- RAJ-MAMTA कार्यक्रम: डिप्रेशन और चिंता जैसी समस्याओं के लिए व्यापक जागरूकता अभियान।
- सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशिष्ट केंद्र की स्थापना।
- अनिवार्य काउंसलिंग: सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलर्स के माध्यम से मासिक सत्र अनिवार्य।
4. सरकारी दफ्तर अब आपके फोन पर: व्हाट्सएप ई-मित्र की क्रांति
'इज ऑफ लिविंग' (जीवन की सुगमता) को धरातल पर उतारते हुए सरकार ने बिचौलिया संस्कृति (Middlemen culture) को समाप्त करने का डिजिटल हथियार तैयार किया है। ई-मित्र की 100 महत्वपूर्ण सेवाओं को व्हाट्सएप पर लाने से जाति और मूल निवास जैसे प्रमाण पत्र अब केवल एक 'Hi' भेजने की दूरी पर होंगे।
तुलनात्मक चेकलिस्ट: सेवाओं की सुगमता
सेवा का आयाम | पुरानी प्रक्रिया (Legacy) | नई डिजिटल प्रक्रिया (Digital) |
एक्सेसिबिलिटी | ई-मित्र केंद्र पर भौतिक उपस्थिति | व्हाट्सएप चैट के माध्यम से घर बैठे |
डेटा शेयरिंग | बार-बार भौतिक प्रतियां देना | जन आधार से '360 डिग्री' लिंकेज |
सत्यापन | भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) | ऑटोमैटिक डिजिटल वेरिफिकेशन |
समय सीमा | कई दिनों का इंतजार | समयबद्ध और तुरंत डिलीवरी |
--------------------------------------------------------------------------------
5. शेखावाटी की हवेलियां और यूनेस्को का सपना: संस्कृति का संरक्षण
यह बजट केवल ईंट-पत्थर के बुनियादी ढांचे का नहीं, बल्कि राजस्थान की 'सांस्कृतिक आत्मा' के संरक्षण का भी है। झुंझुनू, सीकर और चूरू की 660 से अधिक हवेलियों के संरक्षण के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
विश्लेषक की दृष्टि: यह योजना निजी विरासत को एक आर्थिक संपत्ति (Economic Asset) में बदलने का प्रयास है। 'फसाड इंप्रूवमेंट' (बाहरी सुंदरीकरण) के माध्यम से इन हवेलियों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करवाने का लक्ष्य राजस्थान की 'सॉफ्ट पावर' को मजबूती देगा।
--------------------------------------------------------------------------------
6. आगामी पीढ़ी के लिए 'जादुई पिटारा' और ई-वाउचर्स
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने ग्रामीण स्तर तक 'स्मार्ट लर्निंग' को ले जाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप किया है। यहाँ निवेश केवल सामग्री पर नहीं, बल्कि Foundational Literacy and Numeracy (FLN) यानी बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर है, जो विकास का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
- जादुई पिटारा (₹323 करोड़): 22,746 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए आधुनिक खेल और शिक्षा सामग्री।
- मेधावी छात्रों को ई-वाउचर्स: कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को टैबलेट के लिए ₹20,000 के ई-वाउचर।
- व्यावसायिक शिक्षा: 500 नए स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग की शुरुआत।
यह भी पढ़ें:- भारत-यूएस ट्रेड डील और बजट 2026: वे 5 चौंकाने वाली बातें जो आपकी डिजिटल संप्रभुता को बदल देंगी
--------------------------------------------------------------------------------
7. निष्कर्ष: 'विकसित राजस्थान @2047' की ओर एक कदम
वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा पेश किया गया यह बजट पिछले वर्ष के मुकाबले 41.39% बड़ा है और '10 संकल्पों' (जैसे सशक्त महिला और कुशल युवा) पर टिका है। एक विश्लेषक के रूप में, मैं इस बजट में Capital Expenditure (पूंजीगत व्यय) के लिए ₹1 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान और Per Capita Income (प्रति व्यक्ति आय) को ₹2.23 लाख तक ले जाने के लक्ष्य को राज्य की आर्थिक सेहत के लिए शुभ संकेत मानता हूँ। विशेष रूप से, राजकोषीय अनुशासन दिखाते हुए सरकार ने Fiscal Deficit (राजकोषीय घाटा) में ₹8,000 करोड़ की कमी करने का भी लक्ष्य रखा है।
निश्चित रूप से, बजट के आंकड़े और विजन प्रभावशाली हैं। लेकिन सवाल वही है: क्या यह नया डिजिटल और मानवीय प्रशासनिक मॉडल धरातल पर मौजूद 'रेड-टेपिज्म' (लालफीताशाही) को चुनौती दे पाएगा? क्या राजस्थान का यह 'भगवा बैग' बजट केवल आकर्षक घोषणाओं का एक पुलिंदा है, या यह वास्तव में Gross State Domestic Product (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में स्थायी वृद्धि और सामाजिक न्याय की एक नई पटकथा लिखेगा?
विजन की स्पष्टता और 'ब्रांड राजस्थान' (जैसे RAJ-SURAKSHA और RAJ-MA) की रणनीति संकेत दे रही है कि राजस्थान अब केवल आंकड़ों के पीछे नहीं, बल्कि हर नागरिक की 'इज ऑफ लिविंग' के पीछे दौड़ रहा है।

