अब तक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) की वैश्विक बिसात पर केवल अमेरिका और चीन को ही वजी़र माना जाता था। भारत को अक्सर एक विशाल बाजार या केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की 'बैक-ऑफिस' फैक्टरी के रूप में देखा गया, लेकिन कोर AI विकास की मुख्यधारा में हमारी उपस्थिति नगण्य थी। हालांकि, बेंगलुरु के एक स्टार्टअप 'सरवम AI' (Sarvam AI) ने इस पुरानी धारणा को ध्वस्त कर दिया है। 'सोवरेन AI' (Sovereign AI) के विचार को हकीकत में बदलते हुए, यह कंपनी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित बुनियादी मॉडल्स तैयार कर रही है। 'सोवरेन AI' का अर्थ केवल तकनीक बनाना नहीं, बल्कि अपनी डेटा संप्रभुता, अपनी संस्कृति और अपनी भाषा के आधार पर एक स्वतंत्र डिजिटल भविष्य का निर्माण करना है। सरवम की हालिया सफलता वैश्विक टेक दिग्गजों के एकाधिकार को एक सीधी चुनौती है।
Sarvam Vision: जब भारतीय मेधा ने वैश्विक दिग्गजों को पछाड़ा
सरवम AI का 'सरवम विजन' (Sarvam Vision) एक क्रांतिकारी 'ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन' (OCR) टूल है। यह केवल दस्तावेजों को स्कैन नहीं करता, बल्कि उन्हें गहराई से समझता भी है। हालिया 'Benchmarks' में इसने जो परिणाम दिए हैं, उन्होंने वैश्विक तकनीकी जगत को चौंका दिया है।
- रिकॉर्ड-ब्रेकिंग डेटा: 'सरवम विजन' ने olmOCR-Bench पर 84.3% का शानदार स्कोर हासिल किया है, जो गूगल के नवीनतम मॉडलों (जैसे Gemini 3 Pro) से कहीं बेहतर है। वहीं, वास्तविक दस्तावेजों की समझ परखने वाले OmniDocBench v1.5 पर इसने 93.28% का समग्र स्कोर प्राप्त किया है।
- तकनीकी बढ़त: जहाँ ChatGPT और Gemini जैसे मॉडल अक्सर भारतीय दस्तावेजों के जटिल लेआउट, 'अनस्ट्रक्चर्ड डेटा' और तकनीकी टेबल्स को पढ़ने में विफल हो जाते हैं, वहीं 'सरवम विजन' गणितीय सूत्रों और घने कंटेंट को सटीकता से डिकोड करता है।
- भारतीय संदर्भ की गहराई: वैश्विक मॉडल्स अक्सर पश्चिमी डेटासेट्स पर प्रशिक्षित होते हैं, जिससे वे भारतीय भाषाओं और स्थानीय दस्तावेजों के अनूठे प्रारूपों को नहीं समझ पाते। सरवम ने इसी 'गैप' को भरकर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध की है।
संदेह से सम्मान तक: डी़डी दास (DD Das) का हृदय परिवर्तन
सरवम की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब इसके सबसे मुखर आलोचक भी इसके प्रशंसक बन गए। प्रसिद्ध टेक विश्लेषक डी़डी दास, जिन्होंने पहले भारतीय भाषाओं के लिए छोटे मॉडल्स बनाने की रणनीति पर संदेह जताया था, अब इसे एक मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं। उनका यह हृदय परिवर्तन वैश्विक टेक समुदाय द्वारा भारतीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) को गंभीरता से लेने का संकेत है।
"मैं सरवम के बारे में गलत था। एक साल पहले जब मैंने उनके बारे में लिखा था, तो मुझे लगा था कि छोटे भारतीय भाषा मॉडल प्रशिक्षित करने की दिशा गलत थी। लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह बदल दिया है। उनके पास भारतीय भाषाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ टेक्स्ट-टू-स्पीच, स्पीच-टू-टेक्स्ट और OCR मॉडल हैं, जो वास्तव में बहुत मूल्यवान हैं। साथ ही इनकी कीमत भी बहुत किफायती है।"
बुलबुल V3 (Bulbul V3): भारतीय आवाजों को मिला नया डिजिटल स्वर
सिर्फ दस्तावेजों को पढ़ने तक ही नहीं, सरवम ने आवाजों की दुनिया में भी अपनी धाक जमाई है। उनका नया टेक्स्ट-टू-स्पीच (TTS) मॉडल 'बुलबुल V3' (Bulbul V3) भारतीय आवाजों को एक प्राकृतिक और अभिव्यक्तिपूर्ण डिजिटल पहचान दे रहा है।
- भाषाई विविधता: वर्तमान में यह 11 भारतीय भाषाओं में 35 से अधिक आवाजों का समर्थन करता है, जिसे जल्द ही 22 भाषाओं तक विस्तार देने की योजना है।
- लागत की वास्तविकता: 'किसान एआई' (KissanAI) के संस्थापक प्रतीक देसाई के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 'ElevenLabs' जैसे मॉडल्स को स्वर्ण मानक माना जाता है, लेकिन भारतीय स्टार्टअप्स के लिए उनकी लागत कभी भी व्यावहारिक नहीं रही।
प्रतीक देसाई ने 'बुलबुल' की उपयोगिता पर स्पष्ट रूप से कहा:
"हम अपने भारतीय उपयोग के मामलों के लिए 'बुलबुल' को अपना प्राथमिक TTS मॉडल मानते हैं, और वे हर रिलीज के साथ बेहतर होते जा रहे हैं। इलेवनलैब्स (ElevenLabs) की लागत भारतीय या किसी अन्य भाषा के लिए कभी भी तर्कसंगत नहीं थी।"
वैश्विक AI मानचित्र पर भारत की नई पहचान
सरवम AI की यह उपलब्धि भारत के लिए एक गेम-चेंजर है। यह केवल एक कंपनी की जीत नहीं है, बल्कि उस सोच की जीत है जो मानती है कि भारत को अपनी तकनीकी समस्याओं के लिए अमेरिका या चीन की ओर ताकने की जरूरत नहीं है। वैश्विक प्रयोगशालाओं ने हमेशा उन चुनौतियों को अनदेखा किया जो भारतीय परिदृश्य के लिए विशिष्ट थीं। सरवम ने उन्हीं कमियों को अपनी ताकत बनाया है। यह भारत के 'सोवरेन AI' के सपने की दिशा में एक ठोस कदम है, जो हमें भविष्य में एक स्वायत्त और सशक्त डिजिटल राष्ट्र बनाएगा।
निष्कर्ष: एक भविष्यवादी समापन
'सरवम विजन' और 'बुलबुल V3' जैसे नवाचारों के साथ भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अब AI की वैश्विक दौड़ में केवल एक दर्शक या उपभोक्ता नहीं है। अपनी विशिष्ट समस्याओं के लिए बुनियाद से स्वदेशी समाधान विकसित करना ही हमारी वास्तविक शक्ति है। हम एक ऐसे परिवर्तनकारी युग की दहलीज पर खड़े हैं जहाँ भारत की तकनीकी मेधा दुनिया को रास्ता दिखाएगी।
अब प्रश्न यह नहीं है कि क्या भारत AI में नेतृत्व कर सकता है, बल्कि प्रश्न यह है: "क्या हम उस युग की दहलीज पर हैं जहाँ भारत केवल AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा AI निर्माता बनेगा?"

