अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर निर्णय और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय और उसके बाद के घटनाक्रमों का विश्लेषण है। 20-21 फरवरी, 2026 को आए इस घटनाक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: अदालत ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प के 'रेसिप्रोकल' (पारस्परिक) टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया, यह कहते हुए कि राष्ट्रपति ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत अपनी शक्तियों का उल्लंघन किया है।
- राष्ट्रपति की तत्काल प्रतिक्रिया: निर्णय के कुछ ही घंटों के भीतर, राष्ट्रपति ट्रम्प ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
- संवैधानिक संघर्ष: अदालत ने स्पष्ट किया है कि कर लगाने की शक्ति संविधान के तहत केवल कांग्रेस के पास है। इसके विपरीत, प्रशासन ने इस निर्णय को "अराजकता" और "विदेशी हितों से प्रेरित" बताया है।
- आर्थिक और कानूनी प्रभाव: अब तक एकत्र किए गए लगभग 134 बिलियन डॉलर के रिफंड का मुद्दा अनसुलझा है, और नए टैरिफ से व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर बोझ और बढ़ने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय और कानूनी आधार
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प की आर्थिक रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ को ध्वस्त करते हुए उनके टैरिफ कार्यक्रम को अमान्य कर दिया।
निर्णय के मुख्य बिंदु:
- बहुमत का तर्क: मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय में लिखा कि संविधान ने कर लगाने (taxing authority) की शक्ति स्पष्ट रूप से कांग्रेस को दी है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका का हर देश के साथ युद्ध नहीं चल रहा है।"
- IEEPA की सीमाएं: अदालत ने निर्धारित किया कि 1977 का 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना आयात कर लगाने या टैरिफ कोड को एकतरफा रूप से फिर से लिखने की शक्ति नहीं देता है।
- न्यायाधीशों का विभाजन: 6-3 के इस निर्णय में मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स के साथ तीन उदारवादी न्यायाधीश (सोटोमायोर, केगन, जैक्सन) और दो ट्रम्प द्वारा नियुक्त रूढ़िवादी न्यायाधीश (गोर्सच, बैरेट) शामिल थे। असहमति जताने वाले न्यायाधीश थॉमस, अलिटो और कवानाघ थे।
राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिक्रिया और नया कार्यकारी आदेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाया और तुरंत वैकल्पिक कानूनी रास्तों का उपयोग किया।
तत्काल कार्रवाई:
- 10% वैश्विक टैरिफ: ट्रम्प ने धारा 122 (Section 122) के तहत सभी देशों पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने दावा किया कि यह मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा।
- अतिरिक्त जांच: प्रशासन ने अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटने के लिए धारा 301 (Section 301) और अन्य जांच शुरू करने की घोषणा की है।
- न्यायाधीशों का विभाजन: 6-3 के इस निर्णय में मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स के साथ तीन उदारवादी न्यायाधीश (सोटोमायोर, केगन, जैक्सन) और दो ट्रम्प द्वारा नियुक्त रूढ़िवादी न्यायाधीश (गोर्सच, बैरेट) शामिल थे। असहमति जताने वाले न्यायाधीश थॉमस, अलिटो और कवानाघ थे।
आधिकारिक बयान और आरोप:
- अदालत की आलोचना: ट्रम्प ने निर्णय को "बेहद निराशाजनक" और "हास्यास्पद" बताया। उन्होंने बहुमत वाले न्यायाधीशों को "मूर्ख," "लैप डॉग" और "केवल नाम के रिपब्लिकन" (RINO) कहा।
- विदेशी प्रभाव का दावा: राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट "विदेशी हितों" से प्रभावित है और न्यायाधीशों में देश के हित में कार्य करने के साहस की कमी है।
- उपराष्ट्रपति का रुख: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस निर्णय को "अदालत की अराजकता" करार दिया।
आर्थिक प्रभाव और व्यावसायिक अनिश्चितता
टैरिफ नीति के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है।
| प्रभाव श्रेणी | विवरण |
| व्यावसायिक लागत | एक प्रमुख अमेरिकी बैंक के विश्लेषण के अनुसार, पिछले एक वर्ष में मध्यम आकार की फर्मों द्वारा किए गए टैरिफ भुगतान तीन गुना हो गए हैं। |
| उपभोक्ता बोझ | 'टैक्स फाउंडेशन' का अनुमान है कि IEEPA टैरिफ ने 2025 में अमेरिकी परिवारों पर लगभग $1,000 का अतिरिक्त बोझ डाला, जो 2026 में $1,300 तक बढ़ सकता है। |
| राजस्व बनाम घाटा | टैरिफ से एक दशक में $3 ट्रिलियन जुटाने का अनुमान था, जो महत्वपूर्ण होने के बावजूद बजट घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। |
| रोजगार | टैरिफ की उच्च लागतों के कारण कंपनियों ने कीमतों में वृद्धि की है, भर्ती में कटौती की है या कम लाभ मार्जिन को स्वीकार किया है, जिससे 48 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं। |
वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के उपयोग को रोक दिया है, लेकिन राष्ट्रपति के पास अभी भी अन्य वैधानिक शक्तियां हैं जिनका वे उपयोग कर सकते हैं:
- सेक्शन 122 (ट्रेड एक्ट 1974): यह प्रावधान राष्ट्रपति को "गंभीर भुगतान संतुलन घाटे" (balance-of-payments deficits) को संबोधित करने के लिए 15% तक का अस्थायी आयात अधिभार लगाने की अनुमति देता है। हालांकि, यह अधिभार 150 दिनों के बाद स्वतः समाप्त हो जाता है, जब तक कि कांग्रेस इसे आगे न बढ़ाए।
- सेक्शन 338 (टैरिफ एक्ट 1930): यह उन देशों पर 50% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो अमेरिकी वाणिज्य के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। हालांकि, आधुनिक न्यायिक व्यवस्था में इस प्रावधान की वैधता और सीमाओं का व्यापक परीक्षण अभी शेष है।
- सेक्शन 232 और 301: इन धाराओं का उपयोग पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुचित व्यापार प्रथाओं के आधार पर किया जा चुका है। विशेष रूप से चीन तथा स्टील और एल्युमीनियम आयात पर टैरिफ लगाने के लिए इनका सहारा लिया गया था।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिक्रियाएं
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय: यूरोपीय संघ (EU), जर्मनी और कनाडा ने व्यापार संबंधों में स्थिरता और पूर्वानुमेयता की आवश्यकता पर जोर दिया है। वे वर्तमान में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि संभावित नीतिगत बदलावों और उनके वैश्विक व्यापार पर प्रभाव का आकलन किया जा सके।
- अमेरिकी कांग्रेस: सीनेट के बहुमत नेता चक शूमर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे अमेरिकी उपभोक्ताओं की जीत बताया और टैरिफ को "अवैध और अराजक" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान के तहत कांग्रेस की शक्तियों की पुनः पुष्टि करता है।
- शेयर बाजार: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में हल्की बढ़त देखी गई। निवेशकों ने टैरिफ हटने की संभावना का सकारात्मक संकेत माना, हालांकि समग्र आर्थिक डेटा अब भी कमजोर बना हुआ है, जिससे बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
भविष्य की चुनौतियां और अनसुलझे प्रश्न
इस रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी अनिश्चितता टैरिफ रिफंड को लेकर है। अमेरिकी सरकार अब तक लगभग 134 बिलियन डॉलर एकत्र कर चुकी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने संकेत दिया है कि रिफंड का मुद्दा "अगले पांच वर्षों तक अदालतों में" खिंच सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया है कि क्या पहले से एकत्र किए गए धन को वापस किया जाना चाहिए।
क्या आपको लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद टैरिफ रिफंड का मुद्दा अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में लंबी कानूनी लड़ाई का कारण बनेगा? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध क्यों घोषित किया?
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि राष्ट्रपति ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977’ के तहत अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार कर (Tax) लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस के पास है, इसलिए राष्ट्रपति एकतरफा वैश्विक टैरिफ लागू नहीं कर सकते।
फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने क्या कदम उठाया?
निर्णय के कुछ ही घंटों के भीतर राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 (Section 122) के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का नया कार्यकारी आदेश जारी किया। साथ ही प्रशासन ने धारा 301 सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त व्यापार जांच शुरू करने की घोषणा की।
क्या पहले से वसूले गए 134 बिलियन डॉलर वापस किए जाएंगे?
यह मुद्दा अभी अनिश्चित है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से यह निर्देश नहीं दिया कि पहले से एकत्र किए गए लगभग 134 बिलियन डॉलर वापस किए जाएं या नहीं। यह मामला आने वाले वर्षों में कानूनी विवाद और संभावित अपीलों के माध्यम से तय हो सकता है।
इस फैसले और नए टैरिफ का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
विश्लेषण के अनुसार मध्यम आकार की कंपनियों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अमेरिकी परिवारों पर औसतन $1,000 से $1,300 तक अतिरिक्त बोझ पड़ा है। रोजगार, निवेश और मूल्य वृद्धि पर भी दबाव देखा गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शेयर बाजार में हल्की सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्ज की गई।
राष्ट्रपति के पास अब कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं?
राष्ट्रपति अभी भी ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 के तहत अस्थायी आयात अधिभार, ‘टैरिफ एक्ट 1930’ की धारा 338 के तहत भेदभाव करने वाले देशों पर उच्च टैरिफ, तथा धारा 232 और 301 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुचित व्यापार प्रथाओं के आधार पर टैरिफ लगाने जैसे वैधानिक विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं।