भारतीय सेना को मिली बड़ी ताकत: 2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदे को मंजूरी

भारतीय सेना को मिली बड़ी ताकत: 2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी, अभेद्य होगी देश की सुरक्षा

केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपये के नए हथियारों और उपकरणों की खरीद को हरी झंडी दे दी है।

इस बड़े फैसले में वायुसेना के लिए नए विमान, सेना के लिए स्वदेशी तोपें और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं, जो भारतीय सेना को और ज्यादा ताकतवर बनाएंगे।

भारतीय सेना और रक्षा उपकरणों की तस्वीर
भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत में होने जा रहा है ऐतिहासिक इजाफा।

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वायु सेना की बढ़ेगी ताकत: आएंगे 5 नए S-400 और आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमान

आज के समय में हवा में अपनी ताकत दिखाना और युद्ध के समय तेजी से रसद पहुंचाना बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वायु सेना के लिए पांच और S-400 'ट्रायम्फ' मिसाइल सिस्टम खरीदने का फैसला किया है। यह दुनिया का सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 400 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन को ढेर कर सकता है। अभी हमारे पास इसके तीन स्क्वाड्रन हैं और इस नए सौदे के बाद यह संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी, जिससे हमारा आसमान पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।

इसके अलावा, वायु सेना के पुराने हो चुके An-32 विमानों की जगह अब 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' (MTA) लेंगे। ये नए विमान 18 से 30 टन तक का भारी-भरकम वजन उठा सकेंगे। खास बात यह है कि इनमें से 12 विमान सीधे विदेश से बनकर आएंगे, जबकि बाकी को 'मेक इन इंडिया' के तहत अपने ही देश में तैयार किया जाएगा।

  • 400 किलोमीटर दूर से दुश्मन को खत्म करने वाला ताकतवर S-400 सिस्टम।
  • कुल 10 S-400 स्क्वाड्रन से भारत का आसमान बनेगा एकदम सुरक्षित।
  • पुराने An-32 विमानों की जगह लेंगे नए और आधुनिक MTA विमान।
  • ज्यादातर नए ट्रांसपोर्ट विमान 'मेक इन इंडिया' के तहत देश में ही बनेंगे।

कौन से विमान बन सकते हैं वायु सेना का हिस्सा?

इन नए ट्रांसपोर्ट विमानों (MTA) को बनाने की रेस में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से किसी एक को भारतीय वायु सेना के लिए चुना जाएगा। आइए देखते हैं मुख्य दावेदार कौन-कौन हैं:

विमान का नाम खासियत और मुख्य विवरण
एम्ब्रेयर (Embraer) C-390 26 टन पेलोड क्षमता; भारत की महिंद्रा कंपनी के साथ साझेदारी।
एयरबस (Airbus) A400M 37 टन उठाने की क्षमता; बेहतरीन यूरोपीय तकनीक से लैस।
लॉकहीड मार्टिन C-130J भारतीय वायु सेना पहले से ही इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रही है।

थल सेना की ताकत: 300 नई 'धनुष' तोपें और आधुनिक मिसाइलें

आसमान को सुरक्षित करने के साथ-साथ सरकार थल सेना को भी मजबूत कर रही है। अब भारतीय सेना को 300 नई 'धनुष' तोपें मिलेंगी, जो पूरी तरह भारत में बनी हैं। इससे पहले भी सेना ने इन तोपों का ऑर्डर दिया था, जो दिखाता है कि सेना को स्वदेशी हथियारों पर पूरा भरोसा है। इसके साथ ही, रूस से 445 करोड़ रुपये में 'तुंगुस्का' एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदे जा रहे हैं। ये सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को आसानी से मार गिराने में माहिर हैं।

उपकरण का नाम मुख्य उपयोग
धनुष तोप (स्वदेशी) थल सेना की जमीनी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए।
तुंगुस्का एयर डिफेंस दुश्मन के ड्रोन, विमान और क्रूज मिसाइलों से बचाव के लिए।
आर्मर-पियर्सिंग गोला-बारूद दुश्मन के मजबूत टैंकों को तबाह करने वाले खास गोले।

"स्वदेशी 'धनुष' तोपों और नए हथियारों पर यह बड़ा निवेश विदेशी निर्भरता को खत्म करेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच बनाएगा।"

रक्षा क्षेत्र के जानकार

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और उपकरणों का रखरखाव

सिर्फ नए हथियार खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि जो उच्च-तकनीक वाले हथियार हमारे पास हैं, उनका सही से काम करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए भारतीय नौसेना के 12 'P-8I' समुद्री निगरानी विमानों के रखरखाव के लिए बोइंग इंडिया के साथ 413 करोड़ रुपये का करार हुआ है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरा काम 100 प्रतिशत स्वदेशी तरीके से भारत में ही होगा।

सेना का अंग लिया गया बड़ा फैसला
भारतीय नौसेना 12 'P-8I' निगरानी विमानों का स्वदेशी तरीके से पूरा रखरखाव।
तटरक्षक बल (Coast Guard) समुद्री गश्त के लिए नए और भारी होवरक्राफ्ट्स (ACVs) की खरीद।

सुरक्षा को लेकर कुछ अन्य बड़े कदम

  • सुखोई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमानों के इंजनों की पूरी तरह से मरम्मत (ओवरहाल) की जाएगी।
  • P-8I विमानों के सही रहने से हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों पर नजर रखना आसान होगा।
  • टैंकों और एयर डिफेंस सिस्टम को नए और आधुनिक गोला-बारूद से लैस किया जाएगा।
  • सरकार का ध्यान अब सिर्फ खरीद पर नहीं, बल्कि हथियारों की उम्र बढ़ाने पर भी है।

निष्कर्ष: आगे का रास्ता कैसा होगा?

इस साल अब तक रक्षा मंत्रालय ने कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत अपनी सेना की जरूरतों को लेकर कितना गंभीर है। हालांकि, इन नए हथियारों को सेना में शामिल होने में अभी थोड़ा समय लगेगा क्योंकि इन्हें कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं और टेस्टिंग से गुजरना होगा।

अब इन सभी उपकरणों के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे, जिसके बाद इनकी कड़ी तकनीकी और फील्ड टेस्टिंग होगी। अंत में कीमतों पर बातचीत के बाद कैबिनेट समिति की फाइनल मुहर लगेगी और कॉन्ट्रैक्ट साइन होंगे। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ साल लग सकते हैं, लेकिन जब ये हथियार हमारी सेना का हिस्सा बनेंगे, तो भारत दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतों में से एक होगा।

यह कदम न केवल हमारी सेना को आधुनिक और अजेय बनाएगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को भी एक नई उड़ान देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सरकार ने कितने करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है?

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सेना के तीनों अंगों के लिए कुल 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है।

S-400 मिसाइल सिस्टम क्या है और यह क्यों खास है?

यह दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है, जो 400 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान, ड्रोन या मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर सकता है।

वायु सेना के पुराने An-32 विमानों की जगह कौन लेगा?

पुराने हो चुके An-32 विमानों को हटाकर उनकी जगह नए 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' (MTA) शामिल किए जाएंगे, जो ज्यादा वजन उठा सकते हैं।

'धनुष' तोप की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

'धनुष' पूरी तरह से भारत में निर्मित (स्वदेशी) एक अत्याधुनिक तोप है। थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए 300 और नई धनुष तोपें खरीदी जा रही हैं।

इन सभी नए हथियारों को सेना में शामिल होने में कितना समय लगेगा?

इन हथियारों के लिए अभी टेंडर, टेस्टिंग और कीमत पर बातचीत जैसी लंबी प्रक्रियाएं होंगी। इसलिए इन्हें पूरी तरह से सेना में शामिल होने में कुछ साल का समय लग सकता है।

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