अमेरिकी 15% टैरिफ नीति: सुप्रीम कोर्ट फैसला और वैश्विक असर

अमेरिकी टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव और दुनिया के व्यापार पर उसका असर

हाल ही में अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव देखने को मिला है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी आयातित वस्तुओं पर 15% का वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) लागू करने की घोषणा की है। यह फैसला उस समय आया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए "आपातकालीन टैरिफ" को अवैध करार दे दिया।

अमेरिकी टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव और दुनिया के व्यापार पर उसका असर
अमेरिकी 15% टैरिफ नीति: सुप्रीम कोर्ट फैसला और वैश्विक असर — AI Generated Illustration

यह कदम सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार, अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ रहा है। आइए इसे बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं—क्या बदला है, क्यों बदला है, और इसका फायदा-नुकसान किसे होगा।

1. टैरिफ क्या होता है और यह क्यों लगाया जाता है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि टैरिफ क्या होता है।

टैरिफ वह कर (Tax) है जो कोई देश दूसरे देश से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगाता है। इसका उद्देश्य आमतौर पर दो चीजें होती हैं:

  • घरेलू उद्योगों की रक्षा करना
  • सरकार के लिए राजस्व जुटाना

उदाहरण के लिए, यदि अमेरिका चीन से आयात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 15% टैरिफ लगा देता है, तो उस सामान की कीमत अमेरिका में बढ़ जाएगी। इससे अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में थोड़ा लाभ मिल सकता है।

लेकिन टैरिफ का एक दूसरा पहलू भी होता है—जब कीमतें बढ़ती हैं तो उपभोक्ताओं को महंगा सामान खरीदना पड़ता है। इसलिए टैरिफ हमेशा दोधारी तलवार की तरह होता है।

2. सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी उलटफेर

पहले ट्रंप प्रशासन ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) नामक कानून के तहत कुछ देशों पर "आपातकालीन टैरिफ" लगाए थे। यह कानून आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून का उपयोग इस तरह के व्यापक व्यापारिक टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए अदालत ने उन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया।

यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका था। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने एक नया रास्ता निकाला।

3. धारा 122 के तहत नया 15% वैश्विक टैरिफ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने Section 122 (धारा 122) का इस्तेमाल करते हुए सभी देशों से आने वाले आयात पर 15% का सार्वभौमिक (Universal) टैरिफ लागू कर दिया।

इस नई नीति की खास बातें:

  • सभी देशों पर समान रूप से 15% टैरिफ
  • यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है
  • 150 दिन के बाद इसे जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी
  • यह “तत्काल प्रभाव” से लागू किया गया है

किन वस्तुओं को छूट मिली है?

  • दवाइयाँ (Pharmaceuticals)
  • महत्वपूर्ण खनिज
  • उर्वरक
  • कुछ कृषि उत्पाद

ऑटो और स्टील पर पहले से लगे टैरिफ जारी रहेंगे।

इसका मतलब यह है कि अमेरिका ने एक तरह से “सब पर समान शुल्क” का रास्ता चुना है।

4. कौन जीता, कौन हारा? वैश्विक समीकरण बदले

इस कानूनी बदलाव के बाद कुछ देशों को फायदा हो सकता है, जबकि कुछ को नुकसान।

अल्पकालिक लाभ पाने वाले देश

1. भारत

पहले IEEPA के तहत भारत पर जो टैरिफ थे, वे हट गए हैं। अब भारत पर भी वही 15% टैरिफ लागू है जो बाकी देशों पर है। इससे भारत को अमेरिका के साथ नई व्यापारिक बातचीत में थोड़ा “elbow room” मिला है।

भारत फिलहाल वाशिंगटन की अपनी व्यापारिक यात्रा स्थगित कर चुका है ताकि बेहतर शर्तों पर समझौता किया जा सके।

2. चीन

पहले चीन पर दंडात्मक (Punitive) दरें लगाई गई थीं, जो 15% से अधिक थीं। अब चीन को भी 15% की समान दर का सामना करना पड़ेगा। इससे चीन पर कुल टैरिफ भार में कमी आई है।

3. ब्राजील, कनाडा और मेक्सिको

इन देशों पर पहले विशेष प्रकार के शुल्क लगे हुए थे। अब नई नीति से उनका औसत टैरिफ बोझ कम हुआ है।

नुकसान में रहने वाले देश

1. यूनाइटेड किंगडम (UK)

ब्रिटेन को पहले 10% की विशेष दर मिली हुई थी। अब उसे भी 15% देना होगा। यानी उसकी स्थिति पहले से खराब हुई है।

2. यूरोपीय संघ (EU)

हालांकि EU का कुल टैरिफ बोझ बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन सबसे बड़ी समस्या “अनिश्चितता” है। उन्हें यह चिंता है कि अगर अमेरिका इस तरह से समझौतों को बदल सकता है, तो भविष्य में क्या होगा?

3. जापान

जापान के पास पहले 15% की प्रतिस्पर्धी दर थी, जिससे उसे फायदा था। अब जब सभी देशों के लिए 15% अनिवार्य है, तो उसका विशेष लाभ खत्म हो गया।

5. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: कूटनीतिक तनाव

इस फैसले के बाद कई देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया

यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंग ने इसे “शुद्ध टैरिफ अराजकता” कहा। उनका कहना है कि कोई भी अब यह नहीं समझ पा रहा कि अमेरिका की नीति आखिर है क्या।

यूरोपीय आयोग ने कहा—“एक सौदा, एक सौदा होता है।” यानी अमेरिका को अपने समझौतों का सम्मान करना चाहिए।

ब्रिटेन का रुख

ब्रिटेन ने शांत प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे स्थिति को समझने की कोशिश करेंगे।

चीन की प्रतिक्रिया

चीन ने अमेरिका से एकतरफा टैरिफ हटाने की अपील की है और चेतावनी दी है कि व्यापार युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं होता।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का बचाव

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि नीति नहीं बदली है, सिर्फ कानूनी तरीका बदला है। उन्होंने भविष्य में और कड़े कदम उठाने की भी संभावना जताई।

6. बाजार में हलचल: डॉलर, सोना और शेयर बाजार

नई टैरिफ घोषणा के तुरंत बाद वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल देखने को मिली।

डॉलर में गिरावट

डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले 0.4% गिर गया। इसका मतलब निवेशकों को अमेरिकी नीति पर भरोसा कम हुआ है।

सोने में उछाल

जब भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक “सुरक्षित निवेश” की ओर जाते हैं। इस बार सोना 0.6% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

शेयर बाजार में गिरावट

यूरोपीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी S&P 500 फ्यूचर्स भी नीचे रहे।

बिटकॉइन में उतार-चढ़ाव

शुरुआत में बिटकॉइन गिरा, लेकिन बाद में कुछ सुधार देखा गया।

7. आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—इसका आम लोगों पर क्या असर होगा?

  • आयातित सामान महंगा हो सकता है
  • मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ सकती है
  • कंपनियों की लागत बढ़ेगी
  • नौकरी बाजार पर असर पड़ सकता है

यदि कंपनियां ज्यादा टैक्स देंगी, तो वे या तो कीमत बढ़ाएंगी या लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाएंगी।

8. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

आज दुनिया का व्यापार आपस में जुड़ा हुआ है। एक मोबाइल फोन के पार्ट्स अलग-अलग देशों से आते हैं।

यदि अमेरिका हर आयात पर 15% टैरिफ लगाता है, तो:

  • सप्लाई चेन महंगी हो जाएगी
  • कंपनियां उत्पादन स्थान बदल सकती हैं
  • नए व्यापारिक गठजोड़ बन सकते हैं

भारत जैसे देश इस मौके का फायदा उठाकर खुद को वैकल्पिक उत्पादन केंद्र के रूप में पेश कर सकते हैं।

9. अगले 150 दिन क्यों महत्वपूर्ण हैं?

धारा 122 के तहत यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रहेगा। उसके बाद कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

इन 150 दिनों में:

  • अमेरिका कानूनी रास्ता मजबूत करने की कोशिश करेगा
  • अन्य देश बातचीत करेंगे
  • बाजार अनिश्चित रहेगा

यदि कांग्रेस मंजूरी देती है, तो यह नीति लंबी अवधि के लिए स्थायी हो सकती है।

10. भविष्य की संभावनाएं

संभावित परिदृश्य:

  • अमेरिका और EU के बीच व्यापार युद्ध
  • चीन के साथ नई बातचीत
  • भारत को बेहतर व्यापार समझौता
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीमापन

अगर तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक विकास दर प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष: बदलती दुनिया का संकेत

अमेरिका की यह नई 15% टैरिफ नीति सिर्फ एक आर्थिक कदम नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत भी है।

  • यह नीति अल्पकाल में कुछ देशों को राहत दे सकती है
  • लेकिन दीर्घकाल में अनिश्चितता बढ़ा सकती है
  • बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है
  • वैश्विक व्यापार का ढांचा बदल सकता है

दुनिया अब “मुक्त व्यापार” के दौर से हटकर “सुरक्षात्मक व्यापार” (Protectionism) की ओर बढ़ती दिख रही है।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह कदम अस्थायी राजनीतिक रणनीति है या वैश्विक व्यापार व्यवस्था में स्थायी बदलाव की शुरुआत।

एक बात साफ है—अगले 150 दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

FAQs: अमेरिकी 15% वैश्विक टैरिफ नीति और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिका ने 15% वैश्विक टैरिफ क्यों लागू किया?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए आपातकालीन टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 15% का सार्वभौमिक आयात शुल्क लागू किया। यह कदम कानूनी विकल्प के रूप में उठाया गया।

यह 15% टैरिफ कितने समय तक लागू रहेगा?

धारा 122 के तहत लगाया गया यह आयात अधिभार अधिकतम 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

किन वस्तुओं को इस टैरिफ से छूट दी गई है?

फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयाँ), महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुछ कृषि उत्पादों को इस टैरिफ से छूट दी गई है। हालांकि ऑटो और स्टील पर पहले से लागू टैरिफ जारी रहेंगे।

इस नई टैरिफ नीति से किन देशों को फायदा या नुकसान होगा?

भारत, चीन, ब्राजील, कनाडा और मेक्सिको को अल्पकालिक राहत मिल सकती है। वहीं यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ और जापान को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उनकी पूर्व विशेष दरें समाप्त हो गई हैं।

आम लोगों और वैश्विक बाजार पर इसका क्या असर पड़ेगा?

आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं जिससे महंगाई बढ़ सकती है। डॉलर में गिरावट, सोने की कीमत में उछाल और शेयर बाजार में अस्थिरता देखी गई है। कंपनियों की लागत बढ़ने से रोजगार और निवेश पर भी दबाव पड़ सकता है।

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