ईरान में गहराता सुरक्षा संकट: भारतीयों के लिए एडवाइजरी, बढ़ता अमेरिका-ईरान तनाव और अंदरूनी उथल-पुथल की पूरी कहानी
इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आसान और साफ भाषा में समझा रहे हैं कि ईरान में हालात क्यों तेजी से बिगड़ रहे हैं, भारत सरकार ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह क्यों दी है, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कितना गंभीर है, जिनेवा वार्ता से क्या उम्मीद है और देश के भीतर छात्र आंदोलन किस दिशा में जा रहे हैं।
- भारतीयों के लिए बड़ी चेतावनी: 23 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
- अमेरिकी सैन्य तैयारी: अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में दो बड़े विमानवाहक पोत – USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln – तैनात किए हैं।
- 10 दिन का अल्टीमेटम: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को नए परमाणु समझौते के लिए 10 दिनों की समय सीमा दी है।
- देश के भीतर प्रदर्शन: तेहरान और अन्य शहरों के विश्वविद्यालयों में सरकार विरोधी छात्र आंदोलन फिर से तेज हो गए हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास की सख्त एडवाइजरी
ईरान में हालात सामान्य नहीं हैं। इसी को देखते हुए 23 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक नई और गंभीर एडवाइजरी जारी की। इसमें साफ शब्दों में कहा गया है कि ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिक – चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री, व्यवसायी या पर्यटक – जल्द से जल्द देश छोड़ने की तैयारी करें।
आमतौर पर दूतावास तब “देश छोड़ने” की सलाह देता है जब हालात अस्थिर हों, सैन्य संघर्ष की आशंका हो या बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहे हों। इस बार जारी चेतावनी से स्पष्ट है कि भारत सरकार स्थिति को बेहद संवेदनशील मान रही है।
दूतावास ने क्या निर्देश दिए हैं?
- तुरंत प्रस्थान करें: उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों या सुरक्षित मार्ग से देश छोड़ें।
- दस्तावेज़ साथ रखें: पासपोर्ट, वीज़ा, पहचान पत्र और अन्य जरूरी कागज़ात हर समय तैयार रखें।
- भीड़ से बचें: विरोध प्रदर्शन और संवेदनशील इलाकों में जाने से बचें।
- संपर्क बनाए रखें: दूतावास के हेल्पलाइन नंबर और ईमेल के जरिए नियमित संपर्क रखें।
यह एडवाइजरी सिर्फ औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा संकेत है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव: क्या हालात युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा खतरनाक नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने दो बड़े और शक्तिशाली विमानवाहक पोत – USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln – तैनात किए हैं। विमानवाहक पोत किसी भी देश की सबसे बड़ी समुद्री ताकत माने जाते हैं। इनके साथ लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली और युद्धपोतों का बड़ा बेड़ा होता है।
10 दिनों की समय सीमा क्यों?
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को नए परमाणु समझौते के लिए 10 दिनों का समय दिया है। इसे एक तरह का अल्टीमेटम माना जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अगर वार्ता सफल नहीं हुई, तो सीमित सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
संभावित हमले के लक्ष्य
- रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकाने
- मिसाइल लॉन्च साइट
- परमाणु संवर्धन केंद्र
दूसरी ओर, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकाने “वैध लक्ष्य” होंगे।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने सैन्य अभ्यास भी किया है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अगर यहां संघर्ष होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है।
"अभी हालात बेहद संवेदनशील हैं। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि कूटनीति सफल होगी या सैन्य टकराव होगा।"
— सुरक्षा विश्लेषणजिनेवा वार्ता: शांति की आखिरी उम्मीद?
तनाव के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता प्रस्तावित है। यह वार्ता ओमान की मध्यस्थता से हो रही है।
मुख्य विवाद क्या है?
मुद्दा है यूरेनियम संवर्धन। अमेरिका चाहता है कि ईरान “Zero Enrichment” यानी बिल्कुल भी संवर्धन न करे। वहीं ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह पूरी तरह रुकने को तैयार नहीं है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार “Token Enrichment” यानी सीमित संवर्धन पर समझौता हो सकता है, यदि ईरान पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए सहमत हो।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि समझौता “पारस्परिक सम्मान” पर आधारित होना चाहिए। ईरान दबाव में झुकने को तैयार नहीं है, लेकिन प्रतिबंधों में राहत के बदले रियायत देने पर विचार कर सकता है।
ईरान के भीतर बढ़ती अशांति
बाहरी तनाव के साथ-साथ देश के अंदर भी हालात शांत नहीं हैं। तेहरान और मशहद जैसे शहरों में विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
University of Tehran, Sharif University of Technology और Alzahra University जैसे संस्थानों में छात्रों ने सरकार विरोधी नारे लगाए हैं। ये प्रदर्शन पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की याद में आयोजित किए गए हैं।
ईरानी कुर्दिस्तान क्षेत्र में विपक्षी दलों ने नया गठबंधन बनाया है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।
| क्षेत्र | मौजूदा स्थिति |
| तेहरान | विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन |
| मशहद | सरकार विरोधी रैलियां |
| कुर्दिस्तान क्षेत्र | विपक्षी दलों का नया गठबंधन |
वैश्विक असर और आर्थिक चिंता
यह संकट सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, स्वीडन और सर्बिया ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
इजरायल ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। अगर संघर्ष बढ़ता है, तो यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर सकता है।
तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। अगर युद्ध छिड़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर सीधे पड़ेगा।
आगे क्या? सतर्क रहना ही सबसे बड़ा उपाय
ईरान की स्थिति इस समय बेहद अनिश्चित है। कूटनीतिक वार्ता जारी है, लेकिन सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे दूतावास के निर्देशों का पालन करें और जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान की ओर प्रस्थान करें।
क्या आपको लगता है कि जिनेवा वार्ता से शांति स्थापित होगी या क्षेत्र सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ रहा है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीयों को देश छोड़ने की सलाह क्यों दी है?
ईरान में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव, संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंका और देश के भीतर चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की है। सरकार का मानना है कि हालात अचानक बिगड़ सकते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने या देश छोड़ने की सलाह दी गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इतना गंभीर क्यों हो गया है?
तनाव का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नए परमाणु समझौते के लिए 10 दिनों की समय-सीमा दी है और खाड़ी क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी खुले रखे गए हैं। ईरान ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह जवाबी कार्रवाई करेगा।
क्या ईरान में युद्ध छिड़ने की संभावना है?
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है। जिनेवा में वार्ता प्रस्तावित है, जिससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, यदि बातचीत विफल होती है तो सीमित सैन्य कार्रवाई या क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले कुछ दिन निर्णायक माने जा रहे हैं।
ईरान के भीतर चल रहे छात्र प्रदर्शनों का क्या असर हो सकता है?
तेहरान और अन्य शहरों के विश्वविद्यालयों में छात्र सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि ये आंदोलन व्यापक रूप लेते हैं तो आंतरिक अस्थिरता बढ़ सकती है। अतीत में ऐसे प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई हुई है, जिससे मानवीय संकट की आशंका भी रहती है।
भारतीय नागरिकों को इस समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
भारतीय नागरिकों को दूतावास के निर्देशों का पालन करना चाहिए, अपने पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज हमेशा साथ रखने चाहिए, भीड़-भाड़ वाले और प्रदर्शन क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए तथा आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए। संभव हो तो जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान की ओर प्रस्थान करना बेहतर होगा।