ट्रम्प का 108 मिनट का ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’: रिकॉर्ड, टकराव और 2026 की सियासी जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल का पहला ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन 1 घंटा 48 मिनट तक दिया। यह भाषण अपनी लंबाई, तीखे हमलों और बड़े दावों के कारण चर्चा में है। इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे लंबे संबोधनों में गिना जा रहा है।
भाषण के दौरान अर्थव्यवस्था, टैरिफ, इमिग्रेशन, सुप्रीम कोर्ट, रूस-ईरान, AI और क्लाइमेट पॉलिसी जैसे मुद्दों पर ट्रम्प ने खुलकर अपनी बात रखी। लेकिन विपक्ष ने इसे चुनावी मंच और ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
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रिकॉर्ड तोड़ भाषण और तनावपूर्ण माहौल
यह संबोधन 108 मिनट चला, जिससे यह हाल के दशकों के सबसे लंबे भाषणों में शामिल हो गया। इससे पहले साल 2000 में बिल क्लिंटन का लंबा भाषण चर्चा में रहा था।
कैपिटल हिल के भीतर माहौल बेहद तनावपूर्ण था। कई डेमोक्रेट सांसदों ने भाषण का बहिष्कार किया, जबकि मौजूद विपक्षी सदस्य बीच-बीच में विरोध जताते रहे। ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग लगभग 39% बताई जा रही है, ऐसे में यह भाषण 2026 के मिडटर्म चुनावों की तैयारी जैसा भी दिखा।
अर्थव्यवस्था पर बड़े दावे, जमीनी सवाल
ट्रम्प ने दावा किया कि उनकी नीतियों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था “दहाड़” रही है और महंगाई तेजी से नीचे आई है। उन्होंने शेयर बाजार और रोजगार के आंकड़ों का हवाला देते हुए खुद को मजबूत आर्थिक नेता बताया।
लेकिन आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2025 में नौकरियों की बढ़ोतरी उम्मीद से कम रही। खाने-पीने की चीजों की कीमतें जनवरी के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल से लगभग 2.9% अधिक थीं। आम लोगों के लिए महंगाई अब भी बड़ी चिंता है।
TrumpRx और बिजली बिल का मुद्दा
ट्रम्प ने ‘TrumpRx’ वेबसाइट का जिक्र किया, जिसके जरिए बिना बीमा वाले लोगों को सस्ती दवाएं देने का वादा किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह सीमित असर वाला कदम है।
उन्होंने टेक कंपनियों के साथ समझौते कर बिजली बिल कम रखने का दावा भी किया, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग से कई इलाकों में ऊर्जा लागत बढ़ी है।
सुप्रीम कोर्ट से टकराव: टैरिफ पर सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रम्प के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को गैरकानूनी बताया। भाषण के दौरान ट्रम्प ने इस फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” कहा।
उन्होंने 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने की बात कही और कहा कि इसके लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं है। यह बयान अमेरिकी व्यवस्था के “चेक्स एंड बैलेंसेज” पर सीधी चुनौती माना गया।
इमिग्रेशन पर तीखी बयानबाजी
ट्रम्प ने सीमा सुरक्षा को अपनी प्रमुख उपलब्धि बताया और अवैध प्रवास पर सख्ती का समर्थन किया।
जब उन्होंने मिनेसोटा के सोमाली-अमेरिकी समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी की, तो सदन में भारी हंगामा हुआ। डेमोक्रेट सांसद इल्हान उमर और रशीदा तलाईब ने खुलकर विरोध किया।
ट्रम्प ने अपने समर्थकों से पूछा कि क्या सरकार का पहला कर्तव्य अमेरिकी नागरिकों की रक्षा करना नहीं है। इस दौरान सदन स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंटा दिखा।
नाटकीय पल: वेनेजुएला, तेल और ओलंपिक टीम
ट्रम्प ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मेड्यूरो से जुड़े ऑपरेशन को बड़ी सुरक्षा जीत बताया और दावा किया कि इसके बदले अमेरिका को 80 मिलियन बैरल तेल मिला।
उन्होंने वेनेजुएला के विपक्षी नेता एनरिक मार्केज़ और उनकी भतीजी का परिचय कराया। साथ ही, ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली अमेरिकी पुरुष हॉकी टीम को सदन में बुलाया और गोलकीपर कॉनर हेलेबिक को ‘प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम’ देने की घोषणा की।
AI पर खींचतान: पेंटागन बनाम टेक कंपनियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंटागन और AI कंपनी Anthropic के बीच मतभेद हैं। रक्षा विभाग चाहता है कि AI मॉडल ‘Claude’ के सुरक्षा फीचर्स सेना के लिए ढीले किए जाएं।
कंपनी का कहना है कि वह अपने मॉडल का उपयोग मास सर्विलांस या बिना इंसानी नियंत्रण वाले हथियारों के लिए नहीं चाहती। यह तकनीक और नैतिकता के बीच बड़ा टकराव बन सकता है।
क्लाइमेट पॉलिसी में बदलाव
ट्रम्प प्रशासन ने 2009 की ‘एंडेंजरमेंट फाइंडिंग’ को रद्द कर दिया, जो ग्रीनहाउस गैसों को स्वास्थ्य के लिए खतरा मानती थी।
शुरुआत में इसे तेल कंपनियों के लिए राहत माना गया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों की कानूनी सुरक्षा कमजोर हो सकती है और वे सीधे मुकदमों का सामना कर सकती हैं।
रूस और ईरान पर विरोधाभासी दावे
ट्रम्प ने कहा कि उनके नेतृत्व में दुनिया ज्यादा सुरक्षित है। लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि रूस का सैन्य खर्च 2021 के बाद से दोगुना हुआ है और वह 2026 तक युद्ध जारी रखने में सक्षम है।
ईरान को लेकर ट्रम्प ने कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम खत्म हो चुका है, जबकि उनके अपने दूत ने चेतावनी दी है कि ईरान बम बनाने से सिर्फ एक हफ्ते दूर है। यह विरोधाभास चर्चा का विषय बना।
रिपब्लिकन पार्टी के अंदरूनी विवाद
FBI डायरेक्टर काश पटेल पर सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। सांसद टोनी गोंजालेस भी निजी विवादों के कारण चर्चा में हैं।
इन विवादों से पार्टी की छवि पर असर पड़ा है और 2026 के मिडटर्म चुनावों में इसका प्रभाव दिख सकता है।
‘मिडनाइट हैमर’ रणनीति और USS Ford की तैनाती
ईरान संकट 2026: भारतीयों के लिए एडवाइजरी
निष्कर्ष: शक्ति प्रदर्शन या चुनावी रणनीति?
ट्रम्प का यह 108 मिनट का भाषण एक मजबूत और आत्मविश्वासी नेता की छवि पेश करता है, लेकिन इसके साथ ही कई विवाद और सवाल भी जुड़े हैं।
अर्थव्यवस्था, टैरिफ, इमिग्रेशन, विदेश नीति और पार्टी के अंदरूनी मतभेद—हर मोर्चे पर चुनौतियां मौजूद हैं।
अब निगाहें 2026 के मिडटर्म चुनावों पर हैं। क्या यह भाषण ट्रम्प की गिरती लोकप्रियता को संभाल पाएगा या अमेरिकी राजनीति में नई करवट आएगी?
ट्रम्प का भाषण कितने समय तक चला और यह क्यों खास है?
यह भाषण 1 घंटा 48 मिनट (108 मिनट) तक चला। इसे हाल के अमेरिकी इतिहास के सबसे लंबे स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधनों में गिना जा रहा है।
भाषण में अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रम्प ने क्या दावा किया?
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और महंगाई तेजी से घटी है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार खाद्य कीमतों में वृद्धि और रोजगार की धीमी रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के साथ टकराव किस मुद्दे पर हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को गैरकानूनी बताया। इसके जवाब में ट्रम्प ने 15% नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने की बात कही और कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता से इनकार किया।
इमिग्रेशन पर भाषण के दौरान क्या विवाद हुआ?
ट्रम्प की सोमाली-अमेरिकी समुदाय पर टिप्पणी के बाद डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया। सदन में तीखी बहस और राजनीतिक ध्रुवीकरण साफ दिखाई दिया।
क्या यह भाषण 2026 के मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह भाषण 2026 मिडटर्म चुनावों के लिए राजनीतिक संदेश था। अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और आंतरिक विवाद चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।